प्रयागराज का नाम सुनते ही संगम, कुंभ और कई मंदिरों की याद आती है। इस सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान में अब एक और कड़ी जुड़ने वाली है। प्रयागराज राम सेतु पैदल पुल, जो लगभग 1,200 मीटर लंबा होगा, ऐतिहासिक मिंटो पार्क गेट से शुरू होगा। यह परियोजना शहर की नागरिक सुविधाओं, विरासत और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी।
प्रयागराज राम सेतु(Ram Setu) पैदल पुल – क्या है नया बदलाव?
- पुल की लंबाई लगभग 1,200 मीटर और पुल की चौड़ाई लगभग 5 से 7 मीटर होगी। इस पुल का निर्माण बाढ़ स्तर से लगभग 8 मीटर ऊपर सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए बनाया जाएगा।
- उसमें भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियाँ एवं पुल पर पहुँचने के लिए एलिवेटर(लिफ्ट) और सीढ़ियाँ होंगी।
- डिज़ाइन नाव के आकार पर आधारित होगा ताकि यह सौंदर्य और धार्मिक महत्व दोनों को दर्शाया जा सके।
- अगले दो से तीन महीने में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है और इसे पूरा करने में लगभग चार साल लगेंगे।
- अनुमानित लागत लगभग ₹500 करोड़ है।
यह पुल पहले यमुना बैंक रोड से शुरू होने वाला था, लेकिन अब मिंटो पार्क से शुरू होगा। तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को इस बदलाव से प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान होगा। राम सेतु पैदल पुल प्रोजेक्ट को जुलाई 2025 में गति मिली, जिससे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।
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क्यों है यह पुल खास?
धार्मिक दृष्टि से
श्रद्धालुओं को पुल श्रीमनकामेश्वर मंदिर, शिवालय पार्क, त्रिवेणी पुष्प और साहित्य पार्क से जोड़ेगा।
ऐसा कहा जाता है की भगवान राम ने अपने वनवास काल में यमुना इस जगह से पार की थी जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
पर्यटन और विकास
यह पुल बनने से प्रयागराज में पर्यटन बढ़ेगा।
यह झूंसी का पुल या नए फ्लाईओवर की तरह शहर की पहचान का नया प्रतीक बन सकता है।
आने वाले समय में आसपास की जगहों पर पार्किंग, सड़कों और घाटों को भी सुंदर बनाया जाएगा।
प्रयागराज राम सेतु पैदल पुल का संभावित प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव
- यात्रियों के लिए सुविधाएँ – अब लंबी दूरी या घुमावदार रास्ते की जगह सीधा पैदलचलने का विकल्प मिलेगा।
- पर्यटन का विस्तार – धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नए आकर्षण मिलेंगे।
- बुनियादी ढाँचे को बढ़ाना नए रास्ते, बेहतर पहुँच और सुविधाएं बनाई जाएंगी।
- स्थानीय रोजगार – पर्यटन और निर्माण क्षेत्रों में नए अवसर मिल सकते हैं।
चुनौतियाँ
बजट – इतनी बड़ी परियोजना के लिए समय पर फंड और प्रबंधन आवश्यक है।
पर्यावरणीय असर – यमुना नदी की धारा और पारिस्थितिकी पर असर पड़ सकता है।
रख-रखाव – लंबे समय तक पुल की सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखना चुनौती होगी।
सारांश
प्रयागराज में प्रस्तावित Ram Setu पैदल पुल सिर्फ एक निर्माण योजना नहीं है; यह शहर की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान को नई उंचाई देगा। “राम सेतु” नामक इस मिथकीय यात्रा को श्रद्धांजलि देने के लिए दिया गया है, जिसमें भगवान राम, सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान यमुना पार की होगी। मिंटो पार्क से इसकी शुरुआत रणनीतिक के साथ प्रतीकात्मक भी है।
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