back to top
गुरूवार, अप्रैल 30, 2026

मिंटो पार्क प्रयागराज: ब्रिटिश घोषणा से स्वतंत्र भारत की पहचान तक

Share

परिचय

प्रयागराज, जहाँ गंगा-यमुना और सरस्वती का संगम होता है, वहीं इतिहास और स्वतंत्रता की धाराएं भी बहती हैं। ऐसे ही एक ऐतिहासिक स्थल का नाम है – मिंटो पार्क प्रयागराज। अब इस पार्क को मदन मोहन मालवीय पार्क के नाम से जाना जाता है। यह दर्शनीय स्थान होने के साथ-साथ भारत के औपनिवेशिक इतिहास का एक मौन साक्ष्य भी है।

 मिंटो पार्क प्रयागराज की है ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह पार्क भारतीय इतिहास से जुड़ाव रखता है। यह वहीं स्थान है जहां 1857 की पहली आजादी के लड़ाई के बाद प्रयागराज में विक्टोरिया का घोषणा-पत्र पढ़ा गया था। जिसमें सूचना थी की ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन खत्म हो चुका है और अब सत्ता क्राउन के हाथों में जा चुकी है। इसके साथ ही ब्रिटिश सरकार का शासन हो गया था। 

 प्रयागराज मिंटो पार्क, मदन मोहन मालवीय पार्क

1908 की ब्रिटिश घोषणा और लॉर्ड मिंटो  

इस घोषणा-पत्र के 50 वर्ष पूरे होने पर अर्ल ऑफ मिंटो ने एक उद्घोषणा स्तम्भ स्थापित किया।अर्ल ऑफ मिंटो नें 1910 ई. में इस पार्क की आधारशिला रखी थी। संगमरमर के इस स्तम्भ पर विक्टोरिया और एडवर्ड सप्तम की प्रतिमाएं बनी थी। संगमरमर का शिलालेख और स्तंभ पर घोषणा भी खुदी हुई थी।

 “अब भारत की सर्वोच्च सत्ता ब्रिटिश सम्राट के पास है और भारतवासी ब्रिटिश ताज के प्रति निष्ठावान नागरिक माने जाएंगे।”

 कहाँ स्थित है?

अगर पार्क के लोकेशन की बात की जाय तो यह कीडगंज में पड़ता है। नए यमुना पुल के बगल में ही यह पार्क स्थित है। पास में ही इलाहाबाद किला, सरस्वती घाट और मनकामेश्वर मंदिर जैसे दर्शनीय स्थल भी हैं। हरियाली, नदी का दृश्य और ऐतिहासिक स्मारक इसे एक अद्भुत अनुभव देते हैं। 

स्वतंत्रता के बाद बदलाव

आजादी के बाद इसके शीर्ष पर अशोक के सिंह की प्रतिमा स्थापित किया गया। साथ ही इसका नाम ‘मदन मोहन मालवीय पार्क’ नाम रखा गया। पंडित मदन मोहन मालवीय एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और BHU के संस्थापक थे। इस नामकरण ने इस स्थान को एक राष्ट्रीय गौरव का दर्जा दिलाया।

मिंटो पार्क प्रयागराज का वर्तमान स्वरूप और दर्शनीय स्थल

वर्तमान स्वरूप की बात की जाय तो पार्क मेंं ऐतिहासिक स्तंभ और शिलालेख मौजूद है। यहाँ घने वृक्ष, बैठक के लिए सीट, फव्वारे और पैदल चलने के रास्ते हैं। पार्क में विभिन्न जानवरों की प्रतिमाएं भी बनाई गई है। जिसमें शेर, गैंडा और पक्षियों आदि के अलावा भी हैं। 

मदन मोहन मालवीय पार्क

मदन मोहन मालवीय पार्क पार्क में लगती है फीस 

यह पार्क की फीस निर्धारित है। जिसमें 5 साल से छोटे बच्चों के ली निशुल्क है इसके अलावा शुल्क देना पड़ता है। यहां पर आपको पार्किंग की सुविधा मिल जाती है। और पार्क के अंदर कैन्टीन मिल भी है।  

निष्कर्ष 

मिंटो पार्क प्रयागराज , जिसे अब मदन मोहन मालवीय पार्क कहा जाता है, प्रयागराज का एक छोटा एवं सुंदर पार्क है। भारत के औपनिवेशिक अतीत से आजादी के भविष्य तक की एक यात्रा का भी प्रतीक है। यह पार्क आज भी उस इतिहास को संजोए हुए है जो कभी हमारे देश का शासन करता था।

Read more

Local News

hi_INहिन्दी