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बुधवार, अप्रैल 22, 2026

प्रयागराज से निकले प्रधानमंत्री: क्यों बनी यह धरती राजनीति की नर्सरी?

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भूमिका 

भारत में कुछ शहर ऐसे है जिनका नाम भारतीय राजनीति में सुनहरे अक्षरों मेंं लिखा जाएगा। उन्ही में से है अपना शहर प्रयागराज। इस शहर ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर स्वतंत्र भारत के शासन में कई राजनेता दिए, जो देश को एक नई दिशा प्रदान की। प्रयागराज  सिर्फ गंगा-जमुना-सरस्वती के संगम का शहर नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र का संगम भी है। इस शहर नें ना सिर्फ धार्मिक संस्कृति की ज्योति जलाए रखा बल्कि देश कों सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाला शहर भी बना। आइए जानते है प्रयागराज से निकले प्रधानमंत्री के बारें में संक्षेप में –

प्रयागराज राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत की है धरती 

यह शहर हमेशा से शिक्षा, संस्कृति और आंदोलनों का केंद्र बिन्दु रहा है। तीर्थराज प्रयाग के रूप में प्रसिद्धि बड़े-बड़े नेताओं कों यहां खींच लाती है। प्रयागराज का इलाहाबाद विश्वविद्यालय को “पूर्व का ऑक्सफोर्ड” कहा जाता था, जिसने देश को अनगिनत विद्वान और नेता दिए। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी यह यह शहर कांग्रेस एवं अन्य आंदोलनों का केंद्रीय मंच बना रहा। नेहरू परिवार का आनंद भवन इसका जीता-जागता उदाहरण है जिसमें देश की राजनीति के बड़े फैसले लिए जाते थे।

नेहरू परिवार की विरासत, प्रयागराज से निकले प्रधानमंत्री

प्रयागराज से निकले प्रधानमंत्री के नाम –  

1. पंडित जवाहरलाल नेहरू(1947-64) – आधुनिक भारत के निर्माता

इनका जन्म 14 नवंबर 1889, इलाहाबाद में हुआ था। भारत की आजादी के पश्चात प्रधानमंत्री की बागडोर सर्वप्रथम जवाहरलाल नेहरू जी के हाथों में आइ। आनंद भवन, प्रयागराज ही उनके राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। पहले तो यहां से आजादी की रणनीति उसके बाद भारत के विकास में गति दी। इलाहाबाद ना सिर्फ नेहरू जी का जन्मस्थान रहा बल्कि यह उनके राजनीति जीवन का आधार भी बना। 

2. लाल बहादुर शास्त्री(1964-66) – सादगी और संघर्ष का प्रतीक

इनकी शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ही हुई और इन्होंने यहीं से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। ‘जय जवान जय किसान’ का नारा इनके द्वारा ही दिया गया था। जब एक तरफ देश में युद्ध की स्थिति थी तो दूसरी तरफ अन्न भंडार की कमी हो गई थी। उनकी सादगी और ईमानदारी आज भी भारतीय राजनीति में आदर्श मानी जाती है।

3. इंदिरा गांधी (1966-77, 1980-84) – आयरन लेडी

जवाहरलाल नेहरू की सुपुत्री देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री रही है। बचपन और युवावस्था दोनों प्रयागराज शहर में बीता। उनकी राजनीतिक शिक्षा का स्थान आनंद भवन ही है। 

4. राजीव गांधी(1984-89) – आधुनिक तकनीकी भारत के शिल्पीकार 

इनका भी बचपन और शिक्षा का चरण प्रयागराज में बीता। इनका सबसे अमूल्य योगदान भारत को कंप्यूटर और सूचना क्रांति की ओर अग्रसर करवाना था। ये भी नेहरू-गांधी परिवार की विरासत से सीधे जुड़े रहे।

5. वी.पी. सिंह(1989-90) – सामाजिक न्याय के प्रवक्ता

इनका पढ़ाई भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई थी। वीपी सिंह राजनीतिक जीवन में “मंडल आयोग” लागू करना एक बड़ा कदम माना जाता है। जिससे उन्होंने भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय की नई धारा चलाई। उनके पीएम कार्यकाल ने राजनीति के चरित्र कों बदल कर रख दिया। 

6. चंद्रशेखर (1990-91) – ‘यंग तुर्क’ और जुझारू नेता 

इनका जन्म बलिया जनपद में हुआ था। इनकी भी शिक्षा और राजनीति की पाठशाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय रहा है। प्रधानमंत्री बनने से पूर्व से ही उन्हे विद्रोही एवं बेबाक स्वभाव के लिए जाना जाता था। 

7. गुलज़ारीलाल नंदा(1964, 1966) – कार्यकारी प्रधानमंत्री

ये दो बार कार्यकारी प्रधानमंत्री का पदभार संभाला। उनकी शिक्षा प्रयागराज से ही हुई तथा उनका प्रारम्भिक कार्यक्षेत्र भी यही शहर रहा। प्रयागराज के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों ने एक नई दिशा प्रदान की। 

क्यों प्रयागराज से ही बना प्रधानमंत्री बनाने की धरती?

  1. शिक्षा का केंद्र – प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय का परिवेश और यहाँ की बौद्धिक परंपरा नें भारतीय राजनीति में खास योगदान दिया। यहां की छात्र राजनीति सत्ता की प्राथमिक पाठशाला मानी जाती है।
  2. आंदोलनों की भूमि – क्योंकि भारतीय आजादी की लड़ाई में यह एक स्वतंत्रता संग्राम का बड़ा केंद्र स्थल बन चुका था जिससे लोगों में राजनीतिक जागरूकता विकसित हुई।
  3. गंगा-जमुनी संस्कृति – यह शहर अनेकता में एकता का अच्छा उदाहरण रहा है। इस शहर में सहिष्णुता, विविधता और लोकशक्ति का संगम का अद्भुत संगम पाया जाता है।
  4. नेहरू परिवार का प्रभाव – जब से आनंद भवन को एक रणनीति स्थल के रूप में स्थापित हुआ तब से राजनीति की प्रयोगशाला बना जिसका प्रभाव हमें भारतीय राजनीति में देखने को मिलता है।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी प्रयागराज से निकले प्रधानमंत्री  की पाठशाला

आज की स्थिति: प्रयागराज से निकले प्रधानमंत्री के संदर्भ में?

हालांकि अब इस शहर से खिसकर राजनीति का केंद्र बड़े शहरों में चला गया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का असर पहले जैसा नहीं रहा। फिर भी यह शहर अब भी भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक और भावनात्मक केंद्र है। 

निष्कर्ष

प्रयागराज से निकले प्रधानमंत्री लेख से पता चलता है की प्रयागराज सिर्फ एक शहर नहीं रहा बल्कि यह भारतीय राजनीति का मूल केंद्र रहा है। यहाँ से निकले नेताओं ने भारत को न सिर्फ प्रधानमंत्री बनाया बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और तकनीकी रूप से भी बदल दिया।यह शहर देश को प्रधानमंत्रियों के अलावा फिराक गोरखपुरी, हरिवंश राय बच्चन, महादेवी वर्मा और राजा हर्षवर्धन, मदन मोहन मालवीय जैसे साहित्यकार एवं समाजसेवी भी दे चुका है। यानी शहर नेता के अलावा विचारों और संस्कृतियों की राजधानी रहा है।

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