प्रयागराज के सिंगरौर, गढा कटरा और घूरपुर गाँव केवल कृषि या स्थानीय जीवन से नहीं जुड़े रहेंगे। इन गाँवों को ग्रामीण पर्यटन हब बनाने की बड़ी योजना उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरू की है। इसका उद्देश्य देश-विदेश में गाँवों की सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक हस्तशिल्प को पहुंचाना है। प्रयागराज ग्रामीण पर्यटन के बार में विस्तार से जानिए।
प्रयागराज ग्रामीण पर्यटन योजना का खाका
- प्रदेश सरकार ने 234 गाँवों को नामांकित किया है, जिनमें प्रयागराज के ये तीन गाँव भी हैं।
- इन गाँवों में होमस्टे, पर्यटन स्थल विकास और हस्तशिल्प केंद्रों के लिए परिरक्षित ढाँचे बनाए जाएंगे।
- यहाँ बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, बिजली, पानी, शौचालय और डिजिटल सुविधा) को पर्यटन विभाग और ग्राम पंचायत मिलकर मजबूत करेंगे।
- हर गांव में दस होमस्टे यूनिट्स बनाए जाने की योजना है, जिससे पर्यटक गाँवों के रोजमर्रा-जीवन का अनुभव कर सकेंगे।
- स्थानीय किसानों और कारीगरों को प्रशिक्षण मिलेगा, जो उनके लिए अतिरिक्त आय का स्रोत होगा।
क्यों चुने गए ये गाँव?
- सिंगरौर गाँव – ऐतिहासिक महत्व और गंगा नदी की सुंदरता इस गाँव की पहचान हैं। रामायण से संबंधित यात्रा के लिए प्रसिद्ध है। इसमें निषदराज किला (Nishadraj Fort), श्रिंगि ऋषि मंदिर (Shringi Rishi Temple), शांता माता मंदिर और निषादराज पार्क स्थित है। यहाँ बोट म्यूज़ियम और वेलनेस सेंटर भी आकर्षक स्थान हैं।
- गढा कटरा गाँव – गढ़वा किला और झरने (waterfalls) जैसे प्राकृतिक स्थान यहाँ विकसित करने की योजना है। पर्यटकों को स्थानीय लोकनृत्य, मेले और धार्मिक परंपराएँ आकर्षित कर सकती हैं।
- घूरपुर गाँव – इसमें ASI द्वारा संरक्षित सीता रसोई (Sita Rasoi), भिटा किला (Bhita Fort), सुजावन देव मंदिर और यमुना नदी किनारे नौकायन सुविधाएँ शामिल है। इसे खास तौर पर प्राकृतिक दृश्यों और पारंपरिक ग्रामीण जीवन का चित्रण करने के लिए चुना गया है।
ग्रामीण पर्यटन का बढ़ता महत्व
ग्रामीण पर्यटन केवल गाँवों की सुंदरता का प्रदर्शन नहीं करता। यह एक समग्र विकास मॉडल है :
- आर्थिक: स्थानीय कारोबार में वृद्धि होगी; यात्रियों की मांग से स्थानीय कृषि और हस्तशिल्प भी लाभ उठाएंगे। खेती करने के अलावा किसानों को आय के अवसर मिलते हैं।
- वातावरण: यदि योजनाओं में संतुलन है – नदी किनारे सुरक्षित नौकायन करना, स्थानीय संसाधनों के हिसाब से होमस्टे बनाना, आदि से प्राकृतिक पर्यावरण को फायदा मिल सकता है। युवा लोग ग्रामीण क्षेत्रों में गाइड, होमस्टे मैनेजर या हस्तशिल्प विक्रेता बन सकते हैं।
- संस्कृति की रक्षा: स्थानीय सम्पन्नता के साथ गाँव की परंपराएँ और सांस्कृतिक धरोहर को बचाया जा सकेगा।
पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश भी ग्रामीण पर्यटन के विकास में भारत सरकार का सहयोग कर रहा है।
सारांश
प्रयागराज ग्रामीण पर्यटन के अंतर्गत तीन गाँवों को ग्रामीण पर्यटन हब बनाने की यह पहल स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को नया जीवन देगी और गाँवों की पहचान बदलेगी। अगर योजना सही ढंग से लागू की जाती है, तो ये गाँव भविष्य में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।
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