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गुरूवार, मई 14, 2026

कलात्मक धरोहर को अलविदा – पद्मश्री प्रो. श्याम बिहारी अग्रवाल का निधन

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प्रयागराज की सांस्कृतिक और शैक्षणिक धरोहर को गहरा धक्का लगा है। पद्मश्री सम्मानित प्रोफेसर श्याम बिहारी अग्रवाल का 6 सितंबर 2025 को 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। एक ऐसे शिक्षक और कलाकार जिसकी छवि सिर्फ इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे भारत और विश्व के कला जगत में एक प्रेरक धरोहर के रूप में रही। 

प्रो. श्याम बिहारी अग्रवाल के बारें में संक्षिप्त जानकारी 

  • प्रो. श्याम बिहारी अग्रवाल का जन्म सिरसा, प्रयागराज में 1 सितंबर 1942 को हुआ था।
  • उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग में संकाय सदस्य के रूप में कार्यरत रहे।
  • वे वॉश पेंटिंग शैली के महारथी थे और देश-विदेश में अपनी कला से प्रतिष्ठित रहे।
  • इसी साल 25 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
  • लंबे समय तक अस्वस्थ रहने के बाद उनका निधन प्रयागराज स्थित अपने आवास पर हृदयगति रुक जाने से हुआ।
  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयाग संगीत समिति, और स्थानीय कलाकारों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
  • उनका अंतिम संस्कार संगम तट पर राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ।

प्रोफेसर श्याम बिहारी अग्रवाल का जीवन और कहानी

प्रो. अग्रवाल ने कला को तकनीकी ज्ञान से अलग रखते हुए उसकी सामाजिक और भावनात्मक व्यापकता को समझाने का प्रयास किया। “कला आंखों से नहीं, आत्मा से देखी जाती है“, उनका प्रसिद्ध वाक्य है।  वह सिर्फ एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में हजारों विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और भावनाओं से सजग बनाया।

प्रयागराज की कला और साहित्य को उनकी लेखनी के प्रति समर्पण ने देश-विदेश में प्रसिद्ध किया। साथ ही स्थानीय कला संगठनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनका अमूल्य योगदान रहा।

कला जगत में उनका प्रभाव

  1. इलाहाबाद म्यूजियम और प्रयाग संगीत समिति में सबसे सक्रिय सदस्य थे।
  2. भारत की ओर से कई अंतरराष्ट्रीय कला समारोहों में प्रतिनिधित्व किया।
  3. वह न केवल एक कलाकार थे, बल्कि एक प्रेरक शिक्षक और समाजसेवी भी थे।
  4. उनका मानना रहा कि कला संवेदनशीलता और समरसता को बढ़ाती है।

प्रोफेसर अग्रवाल जी के सम्मान और उपलब्धियां

2025 में पद्मश्री पुरस्कार दिया गया था। उनके योगदान को उत्तर प्रदेश सरकार और कई कला संस्थाओं ने भी स्वीकारा है। बहुत से शोध पत्र और पुस्तकें प्रकाशित कीं। बहुत से उनके छात्र आज कला के क्षेत्र में सफल हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने कहा कि प्रो. अग्रवाल को हर समय आत्मीय शिक्षक और गुरु के रूप में स्मरण किया जाएगा। उन्हें उनके शिष्यों ने सोशल मीडिया पर भावुक श्रद्धांजलि दी 

समापन 

प्रो. श्याम बिहारी अग्रवाल ने अपने जीवनकाल में कला और मानवता के गहरे संदेशों को फैलाया। प्रयागराज की कला परंपरा को उनके जाने से काफी नुकसान हुआ है, लेकिन उनकी विरासत और शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक रहेंगी। वास्तविक श्रद्धांजलि उनके आदर्शों को जीना और आगे बढ़ाना होगी।

प्रयागराज से होकर दूसरी सबसे लंबी वंदे भारत ट्रेन का प्रस्ताव। 

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