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बुधवार, फ़रवरी 18, 2026

प्रयागराज के लिए देश की दूसरी सबसे लंबी दूरी वाली वंदे भारत ट्रेन का प्रस्ताव

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प्रयागराज को जल्द ही देश की दूसरी सबसे लंबी दूरी वाली वंदे भारत ट्रेन मिलने वाली है, जिससे रेलवे नेटवर्क में गतिशीलता और बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने रेलवे बोर्ड को एक नई सेवा का प्रस्ताव भेजा है जो शहर की कनेक्टिविटी को उच्चतम स्तर पर ले जाएगा।

दूसरी सबसे लंबी दूरी वाली वंदे भारत ट्रेन की जानकारी 

  • इस ट्रेन की योजना वाराणसी से रायपुर के बीच लगभग 835 किलोमीटर की होगी। यह दूसरी सबसे लंबी दूरी वाली ट्रेन होगी। 
  • रेलवे प्रयागराज जंक्शन से गुजरेगा, जिससे प्रयागराज के यात्रियों को तेज़ी से और कम समय में सफर करने की सुविधा मिलेगी।
  • फिलहाल, रायपुर से वाराणसी के लिए प्रयागराज के माध्यम से तीन एक्सप्रेस ट्रेनें चलती हैं: छपरा दुर्ग सारनाथ, नौतनवा-दुर्ग और गोंदिया-बरौनी। ये ट्रेनें 15 से 19 घंटे में यात्रा करती हैं।
  • वंदे भारत ट्रेन से ये समय ग्यारह से चौदह घंटे तक सिमटनें का अनुमान है।
  • इस ट्रेन को सुबह छह बजे से चलाया जाएगा और रात आठ बजे वाराणसी पहुंच जाएगी। वहीं, वाराणसी से भी ट्रेन समान समय पर चलेगी।
  • वंदे भारत एक्सप्रेस को प्रयागराज में अधिक सुरक्षित रखने के लिए सूबेदारगंज में एक डिपो बनाने की भी योजना है. इससे जल्द ही अधिक वंदे भारत ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
  • वर्तमान में प्रयागराज से चार वंदे भारत एक्सप्रेस चल रहे हैं, जो नई दिल्ली से वाराणसी, गोरखपुर और आगरा के बीच चलते हैं।

दूसरी सबसे लंबी दूरी वाली वंदे भारत ट्रेन का बैकग्राउंड 

  1. वंदे भारत एक्सप्रेस, तेज़ और आरामदायक रेल यात्रा का प्रतीक है, भारत सरकार की नवीनतम आधारशिला का एक हिस्सा है।
  2. भारत में फिलहाल चलने वाली सबसे लंबी वंदे भारत ट्रेन पुणे से नागपुर है, जो 881 किलोमीटर की दूरी 12 घंटे में तय करती है।
  3. यह नई वंदे भारत ट्रेन प्रयागराज में आवागमन के समय में भारी कमी और सुविधा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
  4. रेलवे और स्थानीय प्रशासन की सामूहिक कोशिशें कुम्भ, उद्योग और पर्यटन को आसान बनाने पर केंद्रित हैं।

सरांश 

प्रयागराज के लिए प्रस्तावित यह वंदे भारत ट्रेन देश की रेल यात्रा को एक नई दिशा देगी। यात्रा समय में कमी, बेहतर सुविधा, और कनेक्टिविटी में सुधार से यह परियोजना प्रयागराज को राष्ट्रीय महत्त्व के केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। आगामी कुम्भ और अन्य बड़े आयोजन की दृष्टि से यह कदम बेहद सार्थक साबित होगा।

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