प्रयागराज में स्थित एक ऐसी वास्तुकला के बारे में आज बात करने चल रहे हैं जो रोमन साम्राज्य का राजगृह लगता है। प्रयागराज में स्थित इस आस्था और स्थापत्य के संगम कों All Saints Cathedral prayagraj या पत्थर गिरिजाघर नाम से प्रसिद्ध है। ऑल सैंट्स कैथेड्रल अपनी भव्यता और शांति के लिए प्रसिद्ध है।
All Saints Cathedral prayagaraj का इतिहास की झलक –
इसकी नींव 10 अप्रैल 1871 को सर विलियम मुइर की पत्नी एलिजाबेथ हंटली वेमिस के द्वारा रखी गई। इसकी आधारशिला तो अप्रैल 1871 ई. में रखी गई। जबकि प्रथम बार प्रार्थना के लिए 1887 ई. में खोला गया। वैसे आज जिस रूप में यह दिखता है इसको इसका स्वरूप में देने में 40 साल लग गए। ‘चर्च ऑफ स्टोन’ के वास्तुकार सर विलियम इमर्सन थे। जिन्होंने कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल कों भी डिजाइन किया था।

ऑल सैंट्स कैथेड्रल वास्तुकला और डिज़ाइन –
ऑल सैंट्स कैथेड्रल ब्रिटिश और इस्लामी डिजाइन का एक अनूठा संगम है। यह 13वीं शताब्दी के फ्रेंच गॉथिक रिवाइवल शैली में बना है। इसे बनाने में क्रीम कलर वाला बलुआ पत्थर, संगमरमर, स्टैंड ग्लास, और नक्काशीदार लकड़ी का प्रयोग हुआ है।
बात करें इसके लंबाई की तो 240 फिट चौड़ाई 56 फिट जबकि ऊंचाई 103 फिट के आस-पास है। इसका जो मुख्य हाल(नैव) है उसकी लंबाई 130 फिट जबकि चौड़ाई 40 फिट है। वहीं इसमें 400 से 500 लोग या सकते हैं।
ऑल सैंट्स कैथेड्रल अंदरूनी भव्यता –
इसमें प्रभु यीशु के प्रसंगों को स्टैन्ड ग्लास विंडोज़ में दर्शाया गया है। चर्च के काँचों से सूर्य की किरने इसके आंतरिक वातावरण कों रोशन कर देती हैं। उपदेश मंच, लकड़ी की बेंच, संगमरमर का अल्टर और भित्तिचित्र इसकी सुंदरता को दर्शाते हैं।

परिसर और धार्मिक महत्व –
All Saints Cathedral चर्च के चारों ओर हरा-भरा मैदान इसको और आकर्षक बना देता है। क्रिसमस और ईस्टर जैसे मौकों पर विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती है। यह ना सिर्फ धार्मिक स्थल बल्कि धरोहर, वास्तुकला संग्रह और एक आध्यात्मिक अनुभव है।
All Saints Cathedral prayagraj में कहाँ स्थित है?
यह सिविल लाइंस में स्थित है जहां से संगम की दूरी 4 किमी तो बस स्टैन्ड की दूरी 2 किमी है। यह सुबह से शाम तक खुला रहता है। प्रवेश शुल्क यहाँ पर नहीं लिया जाता है। आप बिना फ्लैश के फोटो भी क्लिक कर सकते हैं। इसे भी पढ़िए – सरस्वती घाट प्रयागराज

