प्रयागराज नें 2025 में स्वच्छता की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता और गुणवत्ता को फिर से सिद्ध किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने “ग्रामीण स्वच्छता नीति” के माध्यम से शुरू किए गए अभियान के दौरान प्रयागराज ने ग्रामीण स्वच्छ सर्वेक्षण-2025(Swachh Survekshan Grameen) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए न केवल अपने नगर में बल्कि पूरे प्रदेश में एक मिसाल कायम की है।
ग्रामीण स्वच्छ सर्वेक्षण-2025 में प्रयागराज का स्थान
- स्वतंत्र निरीक्षण: लखनऊ स्थित एक स्वतंत्र एजेंसी ने प्रयागराज क्षेत्र के 73 ग्रामीण गांवों का क्षेत्र सर्वे करके मूल्यांकन किया।
- मुख्य आधार: इस सर्वे में उच्चतम मानकों, जैसे स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, ODF-Plus (खुले में शौच से मुक्ति) और नागरिकों की भागीदारी पर सटीकता की जांच की गई। इसके अलावा शौचालय की कार्यक्षमता, प्लास्टिक पर आंशिक प्रतिबंध और बायोगैस आधारित कचरा निस्तारण इकाइयों का ऑपरेशनल स्टेटस देखा गया।
- शहरी पहचान से स्थानीय पहचान तक: यह सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को और अधिक बल दिया है। लखनऊ सहित अन्य बड़े शहरों के साथ प्रयागराज ने भी स्वच्छ सर्वेक्षण 2024–25 में “सबसे स्वच्छ गंगा नगर” विशेष श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया और राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया।
- प्रयागराज को “Water Plus City” के खिताब से लगातार दूसरी बार नवाज़ा गया। शहर के जलशोधन और अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र पर केंद्र सरकार की टीम ने मुहर लगाई है।
प्रयागराज की सफाई यात्रा
- 2024–25 में प्रयागराज को “स्वच्छ गंगा नगर” का पुरस्कार मिला। इस उपलब्धि के पीछे शहर के महाकुंभ मेले के दौरान उत्कृष्ट सफाई प्रबंधन भी था।
- स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण का लक्ष्य सिर्फ शौचालय बनाना नहीं है। ODF से ODF Plus, सामुदायिक भागीदारी और सतत जल और कचरा प्रबंधन भी शामिल हैं।
- 2023 में प्रयागराज ने स्वच्छता रैंकिंग में 71वां स्थान था। लेकिन 2024 से 25 तक, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सुधार करते हुए देश के शीर्ष 15 में आ गया।
- स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) भारत सरकार की स्वच्छ भारत अभियान की एक पहल है। जिसमें 2016 से अब तक लाखों शहर और गांवों की सफाई स्थिति आकलन किया जा चुका है।
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प्रभाव और सामूहिक सहयोग
लोगों में गौरव की भावना: नगरपालिका आयुक्त ने बताया कि इस उपलब्धि ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ा दी है।
प्रेरणा का स्रोत: “सबसे स्वच्छ गंगा नगर” पुरस्कार विजेता शहरी मॉडल ने ग्रामीण स्वच्छता को और अधिक मजबूत किया, जिसमें बेहतर कचरा प्रबंधन, निजी शौचालय और जागरूक लोगों की भागीदारी शामिल हैं।
नवाचारों का विकास: ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक खेती, प्लास्टिक प्रतिबंध और घर-घर कबाड़ का निस्तारण जैसे उपाय शुरू हुए, जिससे न केवल स्वच्छता बनी, बल्कि आय भी बढ़ी।
सारांश
ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 में प्रयागराज का नेतृत्व भविष्य के लिए एक आदर्श उदाहरण है। ग्रामीण स्तर से शहरी क्षेत्र तक, प्रयागराज का सफाई मॉडल सामूहिक सहयोग, तकनीकी विकास और सामाजिक भागीदारी से संभव हुआ। यह उपलब्धि सिर्फ रैंकिंग नहीं है; यह बदलाव और “रिड्यूस, रीयूज़, रीसायकल” के स्थायी सिद्धांतों को अपनाने का प्रमाण है।
कलात्मक धरोहर, पद्मश्री श्याम बिहारी अग्रवाल का निधन।

