प्रयागराज में “लखपति दीदियाँ” योजना ने ग्रामीण महिलाओं को जीने और पैसे कमाने का मौका दिया है। आज 1.15 लाख से अधिक महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आत्म-निर्भर स्थिति तक पहुँच चुकी हैं। आइए जानते है लखपति दीदियाँ प्रयागराज से जुड़ी जानकारी के बारे में।
लखपति दीदियाँ प्रयागराज में प्रगति की एक झलक
नीचे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हैं जो योजना की प्रगति को बताते हैं:
- 1,37,999 महिलाओं को प्रयागराज में “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य था जिसमें अब तक 1,15,000 से अधिक महिलाओं नें इसे हासिल किया है। यह सर्वेक्षण लगभग 1,28,000 से अधिक महिलाओं पर किया गया है।
- वहीं राज्य स्तर पर उत्तर प्रदेश में लगभग 17.09 लाख महिलाएं लखपति दीदी हैं।
- ब्लॉकवार रिपोर्ट: सबसे अधिक लखपति दीदियों की बात की जाय तो कोरांव ब्लॉक में सबसे आगे है। कोरांव ब्लॉक में 11,092 लखपति दीदी है। इसके बाद बहरिया (9,492), करछना (7,100) धनपुर और हँडिया ब्लॉक इस लिस्ट में आते हैं।
- SHG की बैंक सखी, कृषि सखी, विद्युत सखी जैसे रोल में महिलाएं परिवार के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था में भी बदलाव ला रही हैं।
- प्रयागराज जिले के कोरांव, हंडिया, करछना और बहरिया ब्लॉकों की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह (SHG) अपना जरिया बनाया है। इसकी मदद से गाय-भैंस पालन, जैविक खेती, दुग्ध उत्पादन, डिजिटल सेवाओं और स्वरोजगार से सालाना ₹1 लाख या अधिक की आय मिल रही है।
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लखपति दीदी योजना की नींव: इतिहास व उद्देश्य
“लखपति दीदी” एक केंद्र-राज्य साझेदारी है, जिसे दीनदयाल अंत्योदय योजना -राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन(DAY-NRLM) के तहत लागू किया गया है। इसके निम्न लक्ष्य है:
- स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।
- कम से कम ₹1 लाख प्रति वर्ष की आय सुनिश्चित करना, जो टिकाऊ हो और व्यापार और कृषि चक्रों में स्थिर रहे।
- महिलाओं को प्रशिक्षण, लोन एवं आजीविका साधन जैसे पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, सिल्क उत्पादों, सोलर ऊर्जा आदि से जोड़ना।
योजना का जमीनी असर
- कोरांव की संजू देवी अब विद्युत सखी बनकर हर साल 1.5 लाख रुपये कमाती हैं।
- हंडिया ब्लॉक की बैंक सखी प्रमिला देवी ने दर्जनों महिलाओं को अपने समूह में आत्मनिर्भर बनाया और अपनी खुद की कमाई भी बढ़ाई।
- जिले भर में SHG की महिलाएं बच्चों की पढ़ाई, आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री, जैविक सब्जी की बिक्री, ऑनलाइन कारोबार, पशुपालन सहित कई क्षेत्रों में अपना काम कर रही हैं।
सारांश
“लखपती दीदियाँ” योजना ने प्रयागराज की ग्रामीण महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि उनका सामाजिक सम्मान भी बढ़ाया है। जिला प्रशासन का अगला लक्ष्य हर ब्लॉक में अधिक से अधिक महिलाओं को इस अभियान में शामिल करना है और घर-घर स्किल ट्रेनिंग और डिजिटल ट्रेनिंग की पहुँच सुनिश्चित करना है।
प्रयागराज में डिजिटल ग्राम पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाएगी।

