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गुरूवार, अप्रैल 30, 2026

प्रयागराज में 23 डिजिटल ग्राम: ग्रामीण भारत के डिजिटल भविष्य की झलक

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प्रयागराज ज़िला प्रशासन ने एक बड़ी योजना की शुरुआत की है। इस योजना में 23 गांवों को एक “मॉडल डिजिटल ग्राम” बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रयागराज डिजिटल ग्राम योजना पायलट प्रोजेक्ट लक्ष्य को मई 2026 तक पूरा करना है। यह योजना न केवल आधुनिक तकनीक से ग्रामीण जीवन को जोड़ेगी, बल्कि प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाने का क्षमता रखती है।

क्या है प्रयागराज डिजिटल ग्राम योजना?

हर ब्लॉक से एक गाँव चुना गया है, पायलट प्रोजेक्ट में अभी 23 गांव चुने गए हैं।

इन गांवों में FTTH (Fibre To The Home) तकनीक से  हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध होगा।

प्रत्येक गांव में कम से कम पाँच सरकारी संस्थाओं (पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र) और पाँच वाणिज्यिक प्रतिष्ठान नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।

गाँव के पांच परिवारों को भी चयनित किया जाएगा ताकि ऑप्टिकल फाइबर कनेक्शन तकनीक आम लोगों तक सीधा पहुंचे।

पंचायत अभिकरणों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और परिवारों तक इंटरनेट की सुविधा प्रदान करने की जिम्मेदारी BSNL को सौंपी गई है। 

प्रयागराज डिजिटल ग्राम योजना से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार

  1. शिक्षा: बच्चों को स्मार्ट क्लासेस, डिजिटल लाइब्रेरी और ई-शिक्षा मिलेगी। गावों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अंतर कम होगा।
  2. स्वास्थ्य: गांवों में मरीज टेलीमेडिसिन के माध्यम से सीधे डॉक्टरों से वीडियो कंसल्टेशन कर सकेंगे। प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर ई-रिकॉर्ड होंगे।
  3. प्रबंधन: अब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, पेंशन योजनाएँ, पंचायत सेवाएँ और अन्य सरकारी सुविधाएँ ऑनलाइन होंगी।
  4. नौकरी और अर्थव्यवस्था: स्थानीय युवा को ई-कॉमर्स, डिजिटल स्किल ट्रेनिंग और ऑनलाइन काम करने के नए अवसर मिलेंगे। 

डिजिटल ग्राम योजना की पृष्ठभूमि 

BharatNet के जरिए अब तक 2.18 लाख गांवों को फाइबर नेटवर्क से जोड़ा गया है।

प्रयागराज में पहले से ही 400 पंचायत भवन में डिजिटल पुस्तकालयों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है।

अब प्रशासन का अगला कदम है गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को इंटरनेट से जोड़ना।

इसे भी देखेंप्रयागराज मे 28 ग्राम पंचायतों कों 5वें वित्त में शून्य खर्च को लेकर भेजा गया नोटिस।

चुनौतियाँ

विद्युत और नेटवर्क की निरंतरता। गांवों में बिजली की समस्या है और साथ में नेटवर्क भी कमजोर होता है। बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे लोगों में डिजिटल साक्षरता की कमी। शहर की अपेक्षा गाँव के लोग तकनीकी शिक्षा से कम परिचित है तो प्रशिक्षण का काम आसान नहीं होने वाला। वहीं भविष्य में तकनीकी उपकरणों का सुधार और रखरखाव रखना भी एक चुनौती होगी। 

जिला योजना अधिकारी रविशंकर द्विवेदी का कहना है कि “यह प्रोजेक्ट ग्रामीण प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा।”

प्रतापगढ़ में 14 गांव और कौशाम्बी में 7 गांव चुने गए हैं। इसका लक्ष्य इलाहाबाद मंडल को धीरे-धीरे डिजिटल क्लस्टर में बदलना चाहता है।

सरांश 

प्रयागराज डिजिटल ग्राम योजना केवल तकनीकी नवाचार नहीं है, बल्कि ग्रामीण जीवन को आधुनिक युग में लाने का साधन भी है। यह योजना गांवों को शहरों की तरह अवसर देने का वादा करती है, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार। यह पहल आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत को बदल सकती है अगर चुनौतियों को सही तरीके से संभाला गया।

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