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शुक्रवार, अप्रैल 17, 2026

नागवासुकी मंदिर प्रयागराज – एक रोचक तीर्थस्थल की कथा

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भूमिका: एक ऐसा मंदिर जहां नागदेवता स्वयं पूज्य हैं

प्रयागराज का नाम सुनते ही संगम, कुंभ और बड़े मंदिरों की याद आती है। लेकिन गंगा के तट पर एक मंदिर भी है, जो रहस्य और श्रद्धा का अनोखा संगम है – नागवासुकी मंदिर प्रयागराज। यह मंदिर आम नहीं है; यह नागों के राजा वासुकी को समर्पित भारत के दुर्लभ मंदिरों में से एक है।

पौराणिक कथा: वासुकी नाग की महिमा

 पद्म पुराण के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ था, तब वासुकी नाग ने सुमेरु पर्वत को मंथन रस्सी के रूप में अपनी देह दी थी। समुन्द्र मंथन के उपरांत वासुकि मदरांचल पर्वत पर आराम करने गए। पर उन्हे दर्द से छूटकारा नहीं मिल पा रहा होता है। तब विष्णु जी उन्हे प्रयागराज की शीतल और शुद्ध सरस्वती नदी में स्नान करके इससे छूटकारा पाने का उपाय देते हैं। जिससे बाद में वासुकि को आराम हो जाता है। फिर देवताओं के निवेदन पर वो प्रयागराज में ही रूक गए।

जिसमें इनके एक शर्त थी की कोई संगम स्नान के बाद यहां दर्शन करेगा तब ही उसकी यात्रा पूर्ण होगी। जबकि दूसरी नागपंचमी के दिन विशेष पूजा होनी चाहिए। 

दूसरी कहानी गंगा उत्पत्ति से जुड़ी है 

एक और कहानी कहती है कि जब गंगा आकाश से पृथ्वी पर आई, तो उसका जल तीव्र बहाव से पाताल में पहुंच गया और नागवासुकि की पूंछ पर गिरा, जिससे भोगतीर्थ का निर्माण हुआ, जो नागवासुकि के मार्ग के आगमन पर यहाँ आया। मंदिर के पश्चिमी हिस्से को अब भोगतीर्थ कहा जाता है।

नागवासुकी मंदिर प्रयागराज की वास्तुकला और स्थिति 

यह प्राचीन मंदिर  दारागंज मोहल्ला प्रयागराज में गंगा नदी के किनारे एक शांत बस्ती में स्थित है। मंदिर से सीढ़ियाँ सीधे गंगा घाट की ओर जाती हैं, जो इसे एक तीर्थस्थल का रूप देती हैं। यह मंदिर बहुत प्राचीन है और यह बेसर शैली में बना है। एक बहु-स्तरीय शिखर, ऊपर की ओर उठा हुआ है। गर्भगृह में काले पत्थर की पाँच फनों वाली नाग मूर्ति है। 

कुंभ और नागपंचमी के अवसर पर लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। यहाँ पर मंदिर में भीष्म पितामह, देवी पार्वती, भगवान शिव और गणेश को समर्पित कई छोटे मूर्ति भी हैं।

“Lord Vasuki black‑stone idol inside Nagvasuki Temple Prayagraj”

मंदिर पर किया था औरंगजेब ने हमला 

यह मंदिर भी औरंगजेब कुदृष्टि से नहीं बच पाया था और उसने यहां भी हमला किया था। एक मान्यता तो यह है की दूध की धारा निकलने से वह दर गया, जबकि दूसरी मान्यता है की नागवासुकी का दिव्य रूप देखकर वह भयभीत हो गया। इसके बाद वह यहां से चला गया। 

नागवासुकी मंदिर प्रयागराग का जीर्णोद्धार   

इस मंदिर का जीर्णोद्धार पुरातन काल(18वीं शताब्दी) में नागपुर के राजा श्रीधर भोंसले ने करवाया था। वहीं कुछ साल पहले नेता मुरली मनोहर जोशी जी ने भी इस मंदिर की मरम्मत कराई थी। 

वर्तमान महत्त्व और विशेष आयोजन

नागपंचमी पर यहाँ मंत्र जाप, दूध चढ़ाने और भव्य पूजन का आयोजन होता है। नागपंचमी पर यहाँ मंत्र जाप, दूध चढ़ाने और भव्य पूजन का आयोजन होता है। कुंभ और अर्धकुंभ में शाही स्नान के समय साधु-संन्यासियों की विशेष उपस्थिति होती है। ऐसी मान्यता है की सच्चे मन से यहाँ पूजा करने से नागदोष, भय और मानसिक तनाव दूर होते हैं।

नागवासुकी मंदिर प्रयागराज की आज का मंदिर और स्थानीय विश्वास 

स्थानीय लोग मानते हैं कि नागवासुकी मंदिर में सच्चे मन से प्रार्थना करने पर सर्पदोष, कालसर्प योग, भय और बाधाएं दूर होती हैं। हर नागपंचमी को यहाँ विशेष आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से लोग पूजा करने आते हैं।

मंदिर तक कैसे पहुँचें?

यह मंदिर प्रयागराज जंक्शन से महज 6 किमी की दूरी के आस-पास है जहां से कैब या ऑटो रिक्शा द्वारा आ सकते हैं। इसके अलावा बस के द्वारा सिविल लाइंस आने पर भी आप को यहां के लिए साधन मिल जाते हैं। वहीं प्रयागराज का बमरौली हवाई अड्डा 12 किमी की दूरी पर है। 

निष्कर्ष

दुनिया अभी भी नागवासुकी मंदिर, प्रयागराज का आध्यात्मिक रत्न देखने की प्रतीक्षा करती है। यदि आपने प्रयागराज की यात्रा की है और इस मंदिर को नहीं देखा है, तो आपकी यात्रा अधूरी रह गई है। अगली बार गंगा स्नान करते समय नागवासुकी को देखना न भूलें। आपके जीवन में शायद कोई नया अध्याय खुल जाए।

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