प्रयागराज में इस बार सांस्कृतिक उत्साह अपने चरम पर है। 1 दिसंबर से राष्ट्रीय शिल्प मेला फिर खुलने जा रहा है, और इस मेले में सिर्फ हस्तशिल्प ही नहीं, बल्कि नुक्कड़ नाटक जैसा जीवंत लोक-कलात्मक आयाम भी शामिल किया गया है। यह आयोजन न केवल कारीगरों को मंच देगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों को सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाने का अवसर भी देगा।
प्रयागराज राष्ट्रीय शिल्प मेला से जुड़ी मुख्य जानकारी
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) ने घोषणा की है कि मेले के दौरान छह दिनों की नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता होगी। 1 दिसंबर को प्रतियोगिता मेले के साथ शुरू होगी और हर दिन दोपहर 2 बजे के बाद नुक्कड़ नाटक दिखाए जाएंगे। सभी नाटकों को लगभग 20 मिनट का समय मिलेगा, और निर्णायक मंडल नाटकों की प्रस्तुति का मूल्यांकन करेगा। इस बार इस नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता में कुल 35 प्रविष्टियाँ मिली हैं। पुरस्कार विजेताओं को निम्नलिखित पुरस्कार राशि मिलेगी:
पहले स्थान पर ₹51,000, दूसरे स्थान पर ₹31,000 और तीसरे स्थान पर ₹21,000 दिए जाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा, दो सांत्वना पुरस्कार के रूप में 11,000-11,000 रुपये भी दिए जाएंगे।
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पृष्ठभूमि और मेले का महत्व
- राष्ट्रीय शिल्प मेला परम्परागत रूप से NCZCC के शिल्पग्राम में हर साल राष्ट्रीय शिल्प मेला होता है। इस वर्ष मेला 1 दिसंबर से शुरू होकर 10 दिन तक चलेगा।
- खबरों के अनुसार, इस साल 20 राज्यों के शिल्पकार मेले में भाग लेंगे, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे असम, मणिपुर और नागालैंड) की पारंपरिक कला और संस्कृति को खास महत्व दिया गया है।
- NCZCC, जिसका नाम उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र है, भारत सरकार के संस्कृति विभाग के अधीन काम करता है और लोक कलाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध है। इस केंद्र ने पहले भी लोक नृत्य, संगीत और नाट्य कार्यक्रमों का आयोजन किया है।
- प्रयागराज के सांस्कृतिक विकास और परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण पहल हैं नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता और राष्ट्रीय शिल्प मेला। ये कार्यक्रम देश भर के संस्कृति प्रेमियों को एकत्र करते हैं और स्थानीय कलाकारों को मंच भी देते हैं। इससे स्थानीय सांस्कृतिक और कला विरासत भी मजबूत होती है।
सारांश
प्रयागराज में 2025 में होने वाला राष्ट्रीय शिल्प मेला कला, संस्कृति और परंपराओं का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा। सामाजिक संदेशों को दर्शकों तक पहुंचाने वाली छह दिवसीय नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता इस मेले को और भी आकर्षक बनाएगी। इस सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनने और अपनी संस्कृतियों और कलाओं को साझा करने के लिए सभी को आमंत्रित किया गया है।
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