भू-वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक खोज की है जो इतिहास और आने वाले समय में भू-जल संरक्षण की दिशा को बदल सकती है। 200 किलोमीटर लंबी, 4 किलोमीटर चौड़ी और 15 से 25 मीटर गहरी एक प्राचीन नदी खोजी गई है। यह खोज गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में एक्वीफर मैपिंग(aquifer mapping) के दौरान हुई है। प्रयागराज में प्राचीन नदी की खोज से जुड़ी अपडेट जानिए।
प्रयागराज में प्राचीन नदी की खोज की प्रमुख जानकारी
- भारतीय भूजल एवं सिंचाई विभाग और CSIR-NGRI के संयुक्त प्रयास से गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र (प्रयागराज से कानपुर तक) में लगभग 200 किलोमीटर लंबी, 4 किलोमीटर चौड़ी और 15 से 25 मीटर गहरी प्राचीन नदी की पहचान हुई है।
- इस नदी की जल संग्रहण क्षमता 3,500 से 4,000 मिलियन क्यूबिक मीटर है, जो गंगा-यमुना बेस फ्लो को बनाये रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
- वर्षा जल और सतही जल को भूजल में संचयन करने के लिए लगभग 150 से अधिक Aquifer Recharge(MAR) स्थान निर्धारित किए गए हैं।
- पहले चरण में, लगभग 20 से 25 साइटों पर संरचनाएं बनाई जाएंगी, जिनका आकार लगभग 5 मीटर × 5 मीटर × 3 मीटर होगा।
प्रयागराज में प्राचीन नदी की खोज कैसे हुई?
- इस मिशन में उपग्रह इमेजिंग, रीमोट सेन्सिंग, GIS डेटा, ड्रोन सर्वेयर और 3D एक्वीफर मैपिंग तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया था।
- तकनीक ने बताया कि गंगा-यमुना के दोआब में भूमिगत जलमार्ग हैं, जो प्राचीन नदियों से जुड़े हैं।
- 2023 में शुरू हुई खोज के बाद, परियोजना का दायरा बढ़ गया है और सतत प्रवाह और जल संरक्षण के उपाय खोजे जा रहे हैं।
इतिहास और सांस्कृतिक महत्त्व
- हालाँकि कुछ विद्वानों ने इस प्राचीन भू-जलधारा को पुरानी सरस्वती नदी से जोड़ने का प्रयास किया है। वैज्ञानिकों ने इसे “पेलियोरिवर” (प्राचीन नदी) मानते है, जिसकी पुष्टि के लिए और शोध चल रहे हैं।
- यह खोज भूगर्भीय और सांस्कृतिक इतिहास को देखते हुए गंगा-यमुना के जल स्रोतों और संबंधित धार्मिक विश्वासों को पुनर्जीवित करने में सहायक हो सकती है।
- Namami Gange मिशन: गंगा की धारा को स्वच्छ और अविरल रखने की दिशा में यह परियोजना मील का पत्थर साबित हो सकती है।
सारांश
यह खोज केवल पुरातात्विक महत्व के अलावा जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 200 किमी लंबी इस भूमिगत नदी की खोज से शहर जल संरक्षण का एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। इस अभियान की सफलता आने वाले वर्षों में भू-जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
प्रयागराज में बच्चों के लिए बनाए जाएंगे सभी जोन में पार्क।

