प्रयागराज का माघ मेला लाखों श्रद्धालुओं और धार्मिक आस्था के कारण एक बड़ा आयोजन बन जाता है। यह मेले 3 जनवरी 2026 से लेकर 15–17 फरवरी तक चलेगा और इस दौरान देश भर से भक्त संगम तट पर श्रद्धा से स्नान के लिये आते हैं। ऐसे में प्रशासन और रेल विभाग ने भीड़, यातायात और रेल सेवाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। खासकर प्रवेश मार्गों और ट्रेनों के ठहराव में बदलाव।
क्यों बदले प्रवेश मार्ग? मेले का बढ़ता दबाव
इस बार, प्रयागराज प्रशासन ने भीड़ और ट्रैफिक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। पिछले कुछ वर्षों में, शहर के प्रवेश मार्गों पर, खासकर संगम क्षेत्र के निकट के मार्गों पर, भारी भीड़ और जाम की समस्या होती थी।
इस वर्ष प्रशासन ने –
- पैदल यात्री और सड़क यातायात को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए हैं।
- 43 से अधिक पार्किंग स्थानों और 16 होल्डिंग स्पॉट हैं, जहां वाहनों को व्यवस्थित रूप से रोका जा सकता है।
- मुख्य स्नान तिथियों पर “नो व्हीकल जोन” लागू किया जाएगा, ताकि निजी वाहनों की भीड़ और जाम कम हों।
ये प्रबंध खास तौर पर उन दिनों के लिए हैं, जब संगम में लाखों लोग पवित्र स्नान करने आते हैं। ताकि भीड़ प्रबंधन सुचारू हो सके और खतरे वाली परिस्थितियों से बचाया जा सके, प्रशासन भीड़ को विभाजित करता है और सुरक्षित प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके।
रेलवे ने किया ठहराव एवं प्लेटफॉर्म में बदलाव
माघ मेला के दौरान करोड़ों लोग प्रयागराज आएंगे। भारतीय रेलवे ने इतनी भीड़ को देखते हुए यात्रियों की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण ट्रेन बदलाव किए हैं
1) ट्रेनों के प्लेटफॉर्म बदले गए
रेलवे प्रशासन ने प्रयागराज जंक्शन और प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर करीब 47 ट्रेनों के प्लेटफार्म नंबर में बदलाव किया है। यह परिवर्तन 2 जनवरी से 17 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा।
2) विशेष सेवाएँ और अतिरिक्त ट्रेनें
रेलवे ने अन्य शहरों जैसे वाराणसी, गोरखपुर और झूंसी से विशेष मेले सेवा ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है, ताकि श्रद्धालु आसानी से मेले तक पहुँच सकें।
यह बदलाव यात्री सुविधाओं को बढ़ाते हैं और भीड़ के दबाव को मुख्य मार्गों तक सीमित करने में मदद करते हैं।
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