प्रयागराज की सैन्य विरासत को मजबूत करने वाले एक छोटे से कार्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है। जी हां, प्रयागराज डिफेंस एस्टेट को रक्षामंत्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। Prayagraj Defence Estate Office (प्रयागराज रक्षा संपदा कार्यालय) ने 2025 की शुरुआत से ही यह काम किया है, और अब उस काम का परिणाम मिल रहा है। 16 दिसंबर, 2025 को रक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा उनकी “100 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति” और सैन्य भूमि को अवैध अधिग्रहण से मुक्त कराने के लिए उन्हें “रक्षा मंत्रालय पुरस्कार” प्रदान किया जाएगा।
प्रयागराज डिफेंस एस्टेट को रक्षामंत्री अवॉर्ड का आधार
रक्षा मंत्रालय ने इस कार्यालय को लैंड एंड रिकॉर्ड मैनेजमेंट श्रेणी में चुना है। कार्यालय ने निर्धारित लक्ष्य को 100 प्रतिशत पूरा करते हुए 3,691 एकड़ रक्षा भूमि का सर्वेक्षण किया। इसके अलावा, अवैध कब्जों से सैन्य जमीन को मुक्त कराया, जिसकी बाजार मूल्य करीब 659 करोड़ रुपये आंकी गई।
विशेष रूप से, गाजीपुर में 64.3412 एकड़ और पड़िला में 53.58 एकड़ हवाई पट्टी अतिक्रमण से मुक्त हुई। 2,609 लोगों को पीपीई(सार्वजनिक परिसर) एक्ट 1971 के तहत नोटिस जारी किए गए और अवैध निर्माण हटाए गए। इन प्रयासों ने सरकारी खजाने को भारी नुकसान से बचाया और रक्षा संपत्ति को भी बचाया।
महाकुंभ 2025 के दौरान भी इस कार्यालय का योगदान उल्लेखनीय रहा। रक्षा भूमि पर 13 बुनियादी ढांचे विकसित करने में सहयोग दिया, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को सुविधा मिली। चालू वर्ष में पांच पुराने ग्रांट बंगले खाली कर सेना को सौंपे गए। सर्वे के बाद, इन अवैध कब्जों को पहचाना गया और निकासी शुरू की गई। रक्षा क्षेत्र को वापस सरकार या सेना के पंजीकृत क्षेत्र में लाया गया। साथ ही, संरक्षित जमीन पर तेरह बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं पूरी की गईं, जिससे भूमि की सुरक्षा और उसका विकासात्मक उपयोग सुनिश्चित हुआ।
पुरस्कार वितरण की जानकारी
16 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के चाणक्य ऑडिटोरियम में यह अवॉर्ड प्रदान किया जाएगा। अन्य छावनी बोर्ड जैसे वाराणसी और लखनऊ भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित हो रहे हैं। यह समारोह रक्षा संपदा संगठन की उपलब्धियों को प्रदर्शित करेगा।
सारांश
प्रयागराज रक्षा संपदा कार्यालय को मिलने वाला रक्षामंत्री पुरस्कार एक सराहनीय और सफल प्रशासनिक कदम है। 3,691 एकड़ संरक्षित जमीन का सर्वे, अवैध जमीन को मुक्त करना और 13 बुनियादी ढांचागत निर्माण— इन सबने मिलकर दिखाया कि व्यवधानों को सही नीयत, समय-समय पर कार्रवाई और जवाबदेही से रोका जा सकता है।
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