प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियां विकराल रूप में हैं। दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर हो गया है, और कई क्षेत्रों में पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। प्रयागराज बाढ़ की वजह से पानी घरों, दुकानों और मंदिरों तक घुस गया है, जिससे आम जीवन बाधित हो गया है। सैकड़ों मकान पानी में डूबे हुए हैं, और कई इलाकों में लोग पहली मंजिल या छतों पर रहने को मजबूर हैं।
प्रयागराज बाढ़ के राहत एवं बचाव के लिए प्रशासन ऐक्टिव
बाढ़ कों देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमें लगातार राहत-बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। अब तक, बाढ़ से 108 गांव और मोहल्ले को प्रभावित किया है, जिससे हजारों लोगों को बेघर कर दिया है। बिजली की आपूर्ति और स्कूलों का संचालन बाधित है। प्रयागराज में नर्सरी से लेकर 12 तक की स्कूलों को 7 अगस्त तक बंद कर दिया गया है।
करीब 7,000 लोगों ने प्रशासन की ओर से 18 राहत शिविर खोले हैं। विशेष रूप से बेला, कछार, राजापुर, तेलियरगंज और बघाड़ा में जलभराव होता है। बघाड़ा से एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसमें माता-पिता अपने बच्चे को कमर तक पानी में उठाकर निकलते दिखे। राहत-बचाव में प्रशासन और NDRF/SDRF की टीमें लगातार लगे हुई है।

प्रयागराज बाढ़ अपडेट –
वहीं शाम 4 बजे तक दोनों नदीयां खतरें के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रयागराज में खतरें का निशान 84.73 मीटर है जबकि यमुना नदी शाम में 86.14 मीटर पर बह रही है। जबकि गंगा नाद 86.11 मीटर पर प्रवाहित हो रही है। जबकि अन्य जगहों पर नदी बढ़ी नहीं है पर 85-86 मीटर के ऊपर लगातार प्रवाहित हो रही है।
प्रयागराज के पिछले रिकार्ड के करीब बह रही नदीयां
इससे पहले 2013 और 1978 में ऐसे ही बाढ़ के हालत पैदा हुए थे। 1978 ई. में तो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बाढ़ से निपटने मेंं सहयोग किया था। वहीं 2013 में बाढ़ का पानी 86.6 मीटर पर बह रहा था जो की इस साल के बढ़ के एकदम करीब पहुँच चुका है।

