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बुधवार, फ़रवरी 18, 2026

प्रयागराज का सफर बदलेगा: मांडा रोड-जंगीगंज गंगा पुल को मंजूरी

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प्रयागराज के मांडा रोड और जंगीगंज को जोड़ने वाले गंगा नदी पर लंबे समय से चली आ रही पक्के पुल की मांग आखिरकार पूरी हो गई है। उत्तर प्रदेश शासन ने रविवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दे दी, जिससे क्षेत्र के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

माँडा रोड-जंगीगंज पुल परियोजना की मुख्य जानकारी

यह टू-लेन पुल कुल 1340 मीटर लंबा होगा और इसका निर्माण कार्य 325 करोड़ रुपये की लागत से होगा। शासन की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम तीन महीने के अंदर निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी में जुट गया है। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक रोहित मिश्रा के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया शीघ्र शुरू हो जाएगी और पूरा पुल लगभग तीन वर्षों में तैयार हो जाएगा।

गंगा नदी को पार करने का मुख्य रास्ता मांडा रोड के डेंगुर घाट पर बनेगा। इससे प्रयागराज से मिर्जापुर और वाराणसी की दूरी बहुत कम हो जाएगी। तीन महीनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है और इसे पूरा होने में लगभग 3 साल का समय लगेगा।

लंबे समय से थी पुल की मांग

इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से पक्के पुल की आवश्यकता थी। डेंगुर घाट पर पहले एक अस्थायी पीपापुल था, जो मानसून में बह जाता था और लोगों को बहुत परेशानी होती थी। पुल का प्रस्ताव सेतु निगम ने लगभग छह महीने पहले शासन को भेजा था, जो अंततः मंजूर हो गया।

इसी पुल का इंतजार प्रयागराज जिले के कोरांव, करछना, मेजा, मांडा और जंगीगंज ब्लॉकों के करीब 250 गांवों ने किया था। पास के क्षेत्रों, जैसे धनतुलसी-डेंगुरपुर, में पहले भी पुल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। मेजा-परानीपुर क्षेत्र में भी गंगा पुल की जरूरत थी, जो अब धीरे-धीरे पूरी हो रही है।

माँडा रोड-जंगीगंज पुल से क्या बदलाव आएगा?

इस पुल से सबसे बड़ा फायदा 250 से अधिक गांवों के निवासियों को मिलेगा, जिनका रोजगार, व्यापार और दैनिक यात्रा आसान हो जाएगी। कोरांव से मेजा जाते हुए अब घंटों का घूमाव समाप्त हो जाएगा। मिर्जापुर और वाराणसी जैसे शहरों तक पहुंचने का समय आधा रह जाएगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

इस मंजूरी से स्थानीय लोग बहुत खुश हैं। व्यापारियों का कहना है कि इससे पर्यटन और आर्थिक वृद्धि होगी। भदोही के सीतामढ़ी जैसे धार्मिक स्थानों तक आसानी से पहुंच मिलने से सैलानियों की संख्या बढ़ेगी। ग्रामीणों ने इसे विकास की बड़ी सौगात बताया क्योंकि वे पहले की परेशानियों को याद करते थे।

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