परिचय
आपने कभी सोचा है कि प्रयागराज पवित्र नगरी का रक्षक कौन है? द्वादश माधव प्रयागराज, भगवान विष्णु के बारह रूपों की कहानी यहाँ सबसे अद्भुत है। ये बारह पवित्र स्वरूप सिर्फ मंदिरों में विराजमान है बल्कि वे सदियों से इस शहर की रक्षा, शांति और आध्यात्मिकता की गवाही भी देते हैं। जहां तीन नदियों, गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती मिलती हैं, वहीं भगवान विष्णु के बारह स्वरूपों का निवास भी है!
ऐसा माना जाता है जैसे शिव के बारह ज्योतिर्लिंग पूरे भारत में पूजे जाते हैं, वैसे ही प्रयागराज में विष्णु भगवान के ये बारह माधव स्वरूप भक्तों को आशीर्वादऔर मुक्ति प्रदान करते हैं।
द्वादश माधव की पौराणिक कथा और महत्व
सृष्टि की रचना के शुरुआत मेंं भगवान ब्रह्मा नें प्रयागराज में प्रथम यज्ञ किया था। इस यज्ञ की रक्षा का दायित्व विष्णु जी ने अपने ऊपर लिया था। उन्होंने अपने-आप कों 12 स्वरूपों में विभक्त किया जिन्हें हम द्वादश माधव कहते हैं। ऐसा कहा जाता है की सैकड़ों सालों तक यज्ञ की पवित्रता और सुरक्षा करते रहे।
एक कथा के अनुसार गजकर्ण नामक राक्षस को खाद-खुजली(एक्जिमा) रोग हो गया। जिसके उपाय में नारद जी नें उसे संगम स्नान करने को कहा था। गजकर्ण ठीक हो गया लेकिन वो नदियों का सारा जल पी गया। गंगा-यमुना की रक्षा के लिए भगवान नें 12 रूप लेकर रक्षा की। इसी वजह से ये 12 रूप प्रयागराज की रक्षा में सदैव सचेत रहते हैं।
प्रमुख द्वादश माधव मंदिरों का परिचय
प्रयागराज मेंं द्वादश माधव के 12 मंदिर पौराणिक और ऐतिहासिक मंदिर विद्यमान हैं। जो इस शहर की सुरक्षा और आध्यात्मिक महत्व के दर्शाते हैं। प्राचीन काल में महर्षि भारद्वाज ने इन 12 माधव की पुन: स्थापना की। विभिन्न स्थानों में स्थित इन मंदिरों की विशेषता अलग-अलग है।
वेणी माधव:
दारागंज में स्थित वेणी माधव प्रयागराज के नगर देवता माने जाते हैं। इनको त्रिवेणी संगम का संरक्षक माना जाता है। इसे प्रमुख द्वादश माधव मंदिर माना जाता है श्रद्धालुओं में इनके लिए बहुत मान्यता है।
अक्षयवट माधव:
यह मंदिर गंगा-यमुना के केंद्र में स्थित है, जो शक्ति और स्थिरता का प्रतीक है। यह स्वरूप मूल माधव भी कहलाता है और अक्षयवट के नीचे विराजमान है।
श्रीआदि माधव:
यह मंदिर आदिमाधव के रूप में पूजित है, जो संगम के मध्य जलरूप में विराजमान है, जो भगवान विष्णु के मूल स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है।
शंख माधव:
छतनाग घाट की तरफ बढ़ने पर सदाफल आश्रम प्रांगण में शंख माधव मंदिर स्थित है। ये माधव स्वरूप शंख धारण किए हुए है जिनकी बड़ी श्रद्धा से पूजा की जाती है। पद्म पुराण के अनुसार इसे प्रथम माधव मंदिर कहा गया है।
चक्र माधव मंदिर:
नैनी अराल वाली रोड पर स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर के निकट चक्र माधव मंदिर स्थित है जहां पर भगवान विष्णु जी की विश्राम अवस्था में मूर्ति स्थित है और हाथ में चक्र लिए हुए हैं। इसका वर्णन पद्म एवं अग्नि पुराण में किया गया है। तथा अग्नि पुराण में अग्नि देव के आश्रम के रूप में बताया गया है। इसे चंदेल राजाओं ने बनवाया था।
श्री आदिवेणी माधव मंदिर:
कुछ ही दूर पर अराल घाट की तरफ प्राचीन श्री आदिवेणी माधव मंदिर स्थित है जिन्हें प्रमुख माधव कहा गया है। यह मंदिर चंद्रवंशी वंश द्वारा बनवाया गया था।
गदामाधव मंदिर:
छिवकी स्टेशन के पास गदामाधव मंदिर स्थित है जो थोड़ा आउटर में पड़ता है। इस मंदिर का निर्माण लगभग 1300 ई. में हुआ था।
मनोहर माधव:
चौक के घंटाघर के पास स्थित आशा एंड कंपनी के नजदीक मनोहर माधव स्थित है
अनंत माधव :
अनंतमाधव मंदिर चौफटका के पास ओवर ब्रिज के नीचे स्थित है।
बिंदु माधव:
अशोक नगर के द्रौपदी घाट के पास बिंदु माधव स्थित है। प्रारम्भिक मंदिर यदु वंश द्वारा बनवाया गया था। इसका अब पुनर्निर्माण हो चुका है।
अदृश्य त्रिवेणी माधव:
संगम स्नान के वक्त हम संगम में विराजमान अदृश्य त्रिवेणी माधव के दर्शन खुद कर लेते हैं।
पद्म माधव :
प्रयागराज से 20 किमी दूर सूजावन देव मंदिर भी द्वादश मंदिर है जिसे अदृश्य पद्म माधव के नाम से जाना जाता है।
द्वादश माधव की परिक्रमा
महर्षि भारद्वाज के मार्गदर्शन में लोग इन बारह मंदिरों की परिक्रमा करते थे। आज भी, कई भक्त इसे मोक्षमार्ग मानते हैं। इसका पालन करने से जीवन में सुख, संतुलन, शांति और समृद्धि आती है। इन मंदिरों के दर्शन से माना जाता है कि पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है।
विष्णु की शक्ति, सरलता, अनंतता और सृष्टि के संरक्षण का प्रतीक ये बारह प्रयागराज स्वरूप हैं। तीर्थयात्रा को उनके विचारों से और अधिक धार्मिक अनुभव मिलता है।
रोचक तथ्य
प्रयागराज को “माधव क्षेत्र” भी कहा जाता है, जो यहाँ भगवान विष्णु के निवास का प्रतीक है। माना जाता है कि इन मंदिरों का दशकों से संरक्षण और पुनर्निर्माण हो रहा है ताकि अगली पीढ़ी भी इन्हें देख सकें। ये मंदिर प्रयागराज के तीर्थयात्रियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, खासकर माघ मास और कुंभ मेले के दौरान लोग यहां की यात्रा करते हैं।
निष्कर्ष
द्वादश माधव मंदिर और कहानी एक संस्कृति की धरोहर हैं। ये हमें याद दिलाते हैं कि प्रयागराज, जहां तीन नदियाँ मिलती हैं, भगवान विष्णु के बारह रूपों की पावन परिक्रमा है, जो धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। इस बार जब आप प्रयागराज आएं, तो इन 12 माधव मंदिरों की यात्रा अवश्य करें।
प्रयागराज में स्थित है ताले वाला शिव मंदिर ।

