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शुक्रवार, दिसम्बर 5, 2025

अखाड़ों के पहलवान बनाम कॉलोनी के जिमबॉयज

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“अखाड़ों के पहलवान बनाम कॉलोनी के जिमबॉयज” — आज कल जिम करने का फैशन सा चल रहा है। आजकल हर उस आदमी को जिसे फिट रहने की सोच आई अगले पल वो जिम में डंबल उठता दिख जाएग। पर हमारा पुराना जमाना या यूं कहे की अब भी कुछ लोग इस आधुनिक तकनीकी के बदले देशी स्टाइल को पसंद करते हैं। जहां अखाड़ों में देसी मिट्टी की खुशबू भी है और आज के दिखावे की दुनिया का आईना भी। चलिए थोड़ा और बात करते हैं –

क्या होती है अखाड़ों के पहलवान की शैली –

अब इनकी कार्यशैली की बात ही कर लीजिए। एक पहलवान का अपना एक नियम होता है सुबह 4 बजे उठना। उसे मिट्टी में कसरत और हल्दी-दुध, चना और देशी घी की खुराक प्रतिदिन लेते हैं। इनका एक पहनावा पूरा शरीर बिना वस्त्र के सिवाय एक लंगोट के। एक पहलवान दूसरे पहलवान से टक्कर लेते दिख जाएगा। उसका गुरु खड़ा होकर उन्हे पटखनी देने के दांव-पेंच सिखाता रहता है। ये दिखते तो शांत है पर वो कहते हैं ना तूफान से पहले की शांति। हां वहीं जब लड़ने उतरते हैं तो अच्छे-अच्छों की हालत खराब कर देते हैं। 

जिमबॉयज का होता है अलग ही अपना अंदाज –

वहीं हमारे जिमबॉय जो की कई तरह के होते हैं। एक होते है फिटनेस के उद्देश्य से तो दुसरे होते है जिनको कोई काम नहीं है तो चलो जिम ही जॉइन कर लेते हैं। वहीं इनकी एक प्रजाति तो ऐसी है जो दिल टूटने के बाद जिम जॉइन करते हैं। वैसे आज जिम में जिमबॉय की संख्या में और भी बढ़ोतरी हो जाए आगे वो अपने ‘कल से जिम’ वाले वादों कों गंभीरता से ले लें तो। आज हर लड़का जिम जॉइन करके शरीर हष्ट-पुष्ट रखना चाहता है। 

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अब इनका टाइम कोई फिक्स नहीं होता ये अपने अनुकूलता के हिसाब से आते-जाते हैं। जाड़े में लोग दोपहर में भी जाते हैं जबकि गर्मियों में सुबह और शाम में काफी भीड़ दिखाई दे जाएगी। इनका अपना ब्रांडेड प्रोटीन लेते डंबल उठाते मेहनत करते दिख जाते हैं। 

अक्सर जिमबॉयज होते सोशल मीडिया के दीवाने –

वैसे एक बात तो है बहुत से लोग जिम गए नहीं की सोशल मीडिया पर वर्क आउट करते हुए रील्स डालना  शुरू कर देते हैं। और कैप्शन ‘beast mode on’ लिख डालते हैं। जिमबॉयज का एक सबसे प्यारा यंत्र शीशा होता है जिससे इन्हे बाद प्रेम करते हैं। जिम तो ठीक है मुँह देख रहे है या किसी काम के वक्त शीशा दिख जाए तो अपने डोले तो देख ही लेना है।

वहीं एक पहलवान शायद ही कभी अपने शरीर कों इतने ध्यान से देखता होगा। एक पहलवान कहना है की  “हम वजन नहीं, धरती उठाते हैं,  लड़ाई नहीं, अखाड़ा जीते जाते हैं।” पहले पहलवान गांव-गांव में देखे जा सकते थे और किसी त्योहार जैसे अवसरों पर आपस में ही कुश्ती किया करते थे। लेकिन अब जिम कल्चर आया है लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि दिखी है। आजकल जिम में युवा अपना स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख पा रहे जिससे दिल के दौरा पड़ने से मृत्यु तक हो जा रही है। 

निष्कर्ष –

बात यहां अखाड़ों के पहलवान बनाम कॉलोनी के जिमबॉयज की है ही नहीं। क्योंकि आज के समय में अत्यधिक व्यस्तता होने के कारण लोगों कों फिट रहने के लिए जिम एक सही जगह है। वहीं अगर आपको कुश्ती का शौक है तो पहनिये लंगोट और उतार जाइए अखाड़े में। वैसे भी कुछ जिमबॉयज तो कहते ही हैं “आज़ कल फिट दिखना ही फाइट है, बॉडी बनाओ, इंस्टा हिट है!” प्रयागराज के लड़के बाइक और बड़े-बड़े वादे –

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