कल्पना कीजिए कि आप अस्पताल, स्कूल या रेलवे स्टेशन के बाहर खड़े हैं और अचानक झुंड में भटकते कुत्तों या गायें देखते हैं। प्रयागराज म्यूनिसपल कॉरपोरेशन (PMC) ने अब इस स्थिति को गंभीरता से देखा है। भटकते जानवरों (कुत्ते, गाय आदि) ने शहर के कई संवेदनशील स्थानों, जैसे अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, रेलवे स्टेशन आदि में सुरक्षा चिन्हों को चुनौती दी है, साथ ही जनस्वास्थ्य और शहर की छवि पर भी बुरा असर डाला है। ऐसे में PMC ने इस समस्या से निपटने की तैयारी को तेज करने के लिए प्रयागराज टास्क-फोर्स जानवर नियंत्रण टीमों का गठन किया है।
क्या है प्रयागराज टास्क-फोर्स जानवर नियंत्रण योजना और कैसे काम करेगी?
PMC ने घोषणा की कि कुल दस टीमें बनाई गई हैं, प्रत्येक टीम में सात से आठ प्रशिक्षित सदस्य होंगे। ये टीमें जानवरों को नियंत्रित करते समय मानव-सुरक्षा, जानवरों की देखभाल और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण लेंगी। इसमें प्रमुख स्थान हाईवे पर आने-जाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में अस्पताल परिसर, कॉलेज और स्कूल कैंपस, रेलवे स्टेशन और स्टेशन प्लेटफॉर्म शामिल हैं। योजना के अनुसार, पहला कदम होगा इन जगहों पर भटकते जानवरों की संख्या का पता लगाना, उनके व्यवहार का आकलन करना और रोकथाम और नियंत्रण के लिए उपाय बनाना।
इसके बाद, जानवरों को सुरक्षित तरीके से हटाना, नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर भटके जानवरों को आश्रय-केंद्रों तक ले जाना शामिल है। PMC ने कहा कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुरूप है, जो संस्थागत क्षेत्रों में भटकते कुत्तों-गायों की समस्या को गंभीर मानता है।
आगे क्या होगा तथा मुख्य कदम
- PMC ने एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की मांग की है जो इस कार्यक्रम को नियंत्रित करेगा।
- टीमों का प्रशिक्षण जल्द शुरू होगा, और संवेदनशील स्थानों का सर्वेक्षण और मार्गचित्र बनाया जाएगा।
- संबंधित संस्थानों, जैसे स्कूल-कॉलेज-हॉस्पिटल्स, को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी बाउंड्री और गेट्स-फेन्सिंग सुनिश्चित करें।
- पकड़े गए जानवरों को कार्रवाई के बाद सुरक्षित आश्रय-केंद्रों में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां उनकी देखभाल की जाएगी।
- साथ ही सार्वजनिक सहभागिता और जागरुकता-प्रसार बढ़ेंगे— जानवरों के साथ समस्याएं होने पर लोग समझेंगे और मदद करेंगे।
सारांश
दिन-प्रतिदिन देखने वाली भटकते जानवरों की समस्या सिर्फ खतरे का विषय नहीं है; यह शहर की सुरक्षा, आस्था और सामाजिक शांति का भी विषय है। इस दिशा में, प्रयागराज नगर निगम ने संवेदनशील स्थानों पर विशेष टीमों का गठन किया है। आने वाले समय में इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी जल्दी संसाधन जुटते हैं, टीमें प्रशिक्षित होती हैं और जनता इस कार्यक्रम को सहयोग के रूप में देखती है।
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