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सोमवार, अप्रैल 20, 2026

प्रयागराज में PMAY घोटाला: 9,000 फर्जी लाभार्थियों ने हड़पी सब्सिडी

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गरीब परेशान, अपात्र बना रहे सरकारी योजनाओं को कमाई का जरिया

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का लक्ष्य गरीब और बेघर लोगों को घर प्रदान करना है। लेकिन प्रयागराज जिले में इस योजना के विश्वास को झटका लगा है। हाल ही में हुई जांचों से पता चला है कि फर्जी दस्तावेजों और दलालों की मदद से 9,000 से अधिक अपात्र लाभार्थियों ने सरकारी अनुदान हड़प लिया है। जिसकी वजह से वास्तविक जरूरतमंद को योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है।

कैसे हुआ PMAY घोटाला?

जांच के अनुसार, दलालों और बिचौलियों ने लोगों को फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र देकर उन्हें योजना का हिस्सा बनाया।

  • जिसके बदले में प्रत्येक केस पर मोटी रकम की वसूली गई।
  • इस योजना में ऐसे फर्जी लोग शामिल है जिनके पास पहले से पक्के या दो मंजिला मकान हैं। ये सब होने पर भी उन्हें योजना का लाभ मिल गया।
  • प्रयागराज के केवल शंकरगढ़ ब्लॉक में ही 3,127 फर्जी लाभार्थी मिले। ऐसे लोगों ने दस्तावेज़ तो जमा किए लेकिन पहले से घर होने से घर निर्माण नहीं किया।

सब्सिडी का दुरुपयोग

PMAY के तहत लाभार्थियों को घर बनाने पर सब्सिडी मिलती है।

  • प्रयागराज में इस योजना के हजारों अयोग्य लोगों ने औसतन ₹1.2 लाख की सब्सिडी हड़प ली।
  • अब तक ज्ञात जानकारी के हिसाब से घोटाला 10 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।
  • लोगों ने योजना के नाम पर पैसा लेकर कई निर्माण कार्य शुरू तक नहीं किया।

पेंशन योजनाओं में भी फर्जीवाड़ा

प्रधानमंत्री आवास योजना के अलावा धांधली पेंशन योजना तक भी देखने को मिल रही ।

  • मृत्यु एवं पुनर्विवाह कर चुकी कई विधवा महिलाएँ विधवा पेंशन योजना का लाभ उठा रही थीं।
  • वृद्धा पेंशन योजना में ऐसी 2,300 से अधिक मृत लोगों के नाम सामने आयें हैं जिन्हे अब भी पेंशन मिल रहा।
  • रिपोर्टों के अनुसार, इन योजनाओं में लगभग ४० लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

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प्रशासन की भूमिका और कार्रवाई

इतनी बड़ी संख्या में फर्जी लाभार्थियों के सामने आने से प्रशासन और बैंकों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत या लापरवाही के बिना संभव नहीं था।

हालांकि अब प्रशासन नें इसकी जांच शुरू कर दी है –

  • मुख्य विकास अधिकारी(CDO) हर्षिका सिंह ने फर्जी लाभार्थियों की सूची जारी कर दी है। जिसके बाद रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
  • 2,000 से अधिक डिफॉल्टर्स को नोटिस भेजे गए हैं और उनके खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे।
  • साथ ही कुछ मामलों में FIR दर्ज कराई जाएगी। इसके अलावा दलालों पर कड़ी कार्रवाई की भी उम्मीद जताई जा रही है।

जनता की नाराज़गी

इस घोटाले की वजह से आम लोगों में गुस्सा और निराशा है। लोगों का कहना है कि गरीबों एवं जरूरतमंद का हक़ छीनकर अपात्र लोग और दलाल मज़े ले रहे हैं। लोगों ने सरकार से अपील की है कि जांच कागजों तक सीमित ना होकर दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए और जो हकदार है उन्हे इसका लाभ प्राप्त हो।

आगे की राह

जिला प्रशासन ने फर्जी लाभार्थियों से वसूली और दोषियों की पहचान का काम शुरू कर दिया है। लेकिन ऐसी फर्जीवाड़े से पता चलता है की योजनाओं की जमीनी निगरानी बेहद कमजोर है। इन योजनाओं मेंं पारदर्शी सत्यापन व्यवस्था और रियल-टाइम ऑडिट सिस्टम जब तक नहीं होगा तब तक ऐसे घोटाले होते रहेंगे।

निष्कर्ष

प्रयागराज का प्रधानमंत्री आवास योजना(PMAY) घोटाला एक आर्थिक फर्जीवाड़े के साथ गरीबों के सपनों और विश्वास कों भी तोड़ना जैसा है। सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि भविष्य में ऐसी स्थित ना दोहराई न जा सकें।

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