प्रयागराज के शैलेंद्र सिंह गौर ने एक इंजन बनाया जो एक लीटर पेट्रोल में 176 किलोमीटर की शानदार माइलेज देता है। पुरानी तकनीक से तीन गुना अधिक सक्षम यह इंजन करीब 70% ऊर्जा का उपयोग करता है। शैलेंद्र सिंह गौर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने अपने किराए के घर को अपनी खोज और जुनून के चलते प्रयोगशाला बनाया। अपने आविष्कार के लिए उन्होंने अपनी जमीन, घर और दुकान तक बेच दिया।
इंजन की तकनीक कैसे काम करती है?
यह सिक्स स्ट्रोक इंजन है, जबकि सामान्य इंजन 4 स्ट्रोको के होते हैं। यह इंजन अधिक क्षमता के साथ ईधन भी कम उपभोग करता है। उन्हों ने इसका परीक्षण अपनी 100cc टीवीएस बाइक (2017 मॉडल) में किया। 50ml पेट्रोल में बाइक 35 मिनट तक चल सकती थी और उसका माइलेज 176 किमी/लीटर था।
यह इंजन किसी भी ईधन चालित(fuel-powered) वाहन में काम कर सकता है, जैसे बाइक, कार, बस, ट्रक या जहाज में। यह माइलेज बढ़ाने के अलावा प्रदूषण भी कम करता है। कार्बन मोनोऑक्साइड सहित अन्य गैसें निम्नतम मात्रा में बाहर निकलती हैं।
शैलेंद्र सिंह गौर की संघर्ष और उपलब्धियां
1983 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी (PCM) से स्नातक किया। 2007 में टाटा मोटर्स से नौकरी का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने रिसर्च करना चुना। MNNIT और IIT-BHU के प्रयोगशाला में छह महीने का ट्रैनिंग लिया। भारत सरकार ने इस तकनीक पर दो पेटेंट दिए हैं जबकि कुछ अतिरिक्त पेटेंट जांच के अंतर्गत हैं। साथ ही, उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में एक 120 किलोमीटर प्रति लीटर की बाइक का डेमो भी दिखाया।
भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
- शैलेंद्र अभी एक निवेशक या ऑटो कंपनी की खोज में हैं जो इस तकनीक को उत्पादन के स्तर तक ले जा सकें।
- यदि सरकार या इंडस्ट्री मदद करें, तो यह इनोवेशन आम लोगों तक पहुँच सकता है। वाहन इंडस्ट्री में एक क्रांति ला सकता है।
- कम प्रदूषण उत्सर्जन और ऊर्जा दक्षता अधिक होने से उनका इंजन पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है।
निष्कर्ष
शैलेंद्र सिंह गौर का सिक्स स्ट्रोक इंजन प्रयागराज की भूमि से निकला से एक क्रांतिकारी खोज है। ये वाहन उद्योग और हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जो किफायतीे एवं पर्यावरण के अनुकूल तकनीक है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “जुनून सच्चा हो तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है।”
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