प्रयागराज में एक बार फिर धर्म और अंधविश्वास के बीच की रेखा गायब हो गई। बारा तहसील के ग्राम पंचायत छीड़ी की पहाड़ी पर स्थित पथरबंदी महादेव मंदिर घटना में रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों ने दीवार को तोड़कर मंदिर के आसपास खनन किया। यह घटना धार्मिक रूप से संवेदशील है और स्थानीय लोगों में भारी रोष पैदा हुआ है।
पथरबंदी महादेव मंदिर घटना का पूरा विवरण
माना जाता है कि घटना रविवार बीती रात हुई जब कुछ अनजान लोग मंदिर की दीवार तोड़कर अंदर गए। सुबह ग्रामीणों ने शिवलिंग के पास पत्थर काटने के निशान देखे, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मंदिर क्षेत्र में खुदाई के गड्ढे संकेत देते है की कि ये शायद किसी “छिपे खजाने” की तलाश में खोदे गए थे।
ग्राम प्रधान और पुलिस बल घटनास्थल पर जानकारी मिलते ही पहुंचे। पुलिस नें अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पास में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज पुलिस ने जब्त कर जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने मंदिर की सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी जताई है।
पथरबंदी महादेव मंदिर का महत्व और पृष्ठभूमि
पत्थरबंदी महादेव मंदिर एक सदियों पुराना धार्मिक स्थल है जहां भगवान शिव के साथ हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। पौष, अधिमास और सावन जैसे हिंदू महीनों में आयोजित मेलों का केंद्र भी यह मंदिर है। इस मंदिर के आसपास प्राचीन खजाने के होने की कई लोक कथाएं हैं, जो इस घटना को प्रेरित करती हैं।
राजस्व विभाग की टीम और नायब तहसीलदार बारा विजय कुमार ने स्थिति का जायजा लिया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह धार्मिक भावनाओं की बेइज्जती नहीं बल्कि छिपे खजाने की खोज है।
पर्यटन विभाग नें मंदिर के सुंदरीकरण के लिए किया दौरा
जहां एक ओर मंदिर में तोड़-फोड़ की गई वहीं इसके जीर्णोद्धार के लिए पर्यटन विभाग ने रविवार कों यहाँ का दौरा किया था। ग्राम प्रधान सतीश गुप्ता ने इसकी जानकारी दी। प्रधान नें बताया की पर्यटन विभाग डेढ़ करोड़ रुपये के लागत की योजना में चहारदीवारी, सत्संग भवन, यज्ञशाला और विश्राम स्थल बनाने की योजना है। मंदिर के भव्य बनाने के लिए मार्बल और टाइल्स का प्रयोग किया जाएगा।
सारांश
यह खनन दुर्घटना प्रयागराज के पत्थरबंदी महादेव मंदिर में हुई है, जो एक बार फिर धार्मिक स्थान की सुरक्षा और पुरातात्विक संरक्षण की जरूरत को उजागर करती है। प्रशासन और पुलिस की जांच से मामले में दोषी जल्द ही पकड़ में आने की उम्मीद है। साथ ही मंदिर परिसर का पुनरुद्धार और सुरक्षा प्रणाली को कठोर करना चाहिए ताकि ऐसा फिर से न हो।
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