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बुधवार, फ़रवरी 18, 2026

प्रयागराज में जैविक खेती की नयी शुरुआत: 3,000 बीघे पर खेती किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण एवं अनुदान

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हाल ही में प्रयागराज में 3,000 बीघा भूमि पर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की शुरुआत की गई है। जिसका उद्देश्य खेती की टिकाऊता, मिट्टी की सेहत को सुधारना और किसानों की आय को सुधारना है। यह पहल सिर्फ घोषणा नहीं है; स्थानीय प्रशिक्षण नेटवर्क और राज्य-स्तर की प्राकृतिक खेती नीतियों में शामिल है।

प्रयागराज में 3,000 बीघा पर जैविक खेती

जैविक या प्राकृतिक खेती के तहत जिले या डिवीजन में लगभग 3,000 बीघा जमीन खेती के अंतर्गत लाया जा रहा है। प्रयागराज प्रशासन और संबंधित कृषि विभाग की नवीनतम रिपोर्टों के में इसकी जानकारी दी गई। इस अभियान में किसानों को जैविक बीज, प्राकृतिक खाद बनाने के उपकरण और प्रति एकड़ वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।  किसानों को ₹4,000 प्रति एकड़ की मदद दी जा रही है। इसके साथ ही मुंडेरा मंडी में एक जैविक बाजार का भी उद्घाटन हुआ है, जो किसानों को सीधे बिक्री का माध्यम प्रदान करता है।

जैविक खेती प्रयागराज के मुख्य बिंदु 

  • कुल क्षेत्र: रिपोर्ट के अनुसार लगभग 3,000 बीघा पर यह खेती की जाएगी।
  • वित्तीय सहायता: शासन या परियोजना के तहत किसानों को जैविक बीज और खाद (घनजीवामृत, जीवामृत आदि) तैयार करने के लिए प्रति एकड़ चार हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।
  • लाभार्थी: रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल से प्रारंभिक तौर पर लगभग 1800 किसान जुड़े हैं।
  • बाजार प्रबंधन: मुंडेरा मंडी में एक विशेष जैविक बाजार/बाजार सुविधा का उद्घाटन किया गया है ताकि उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके।
  • प्रशिक्षण और सलाह: किसानों को राज्य का “कृषि सखी” मॉडल और स्थानीय KVK और अन्य कृषि एजेंसियां तकनीकी सहायता देंगे। प्राकृतिक खेती कार्यक्रमों से पहले से ही यह पहल जुड़ी हुई है।
  • प्रयागराज मंडल में  लगभग 2,200 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक और जैविक खेती का लक्ष्य रखा है। जबकि 665 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती शुरू हों गई है। 

प्रयागराज जिले में 12 क्लस्टर

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार  प्रयागराज जिले में ही बारह क्लस्टर बनाए गए हैं। ये क्लस्टर जसरा और भगवतपुर ब्लॉक में केंद्रित हैं। इनमें से सात क्लस्टर जसरा ब्लॉक और पांच भगवतपुर ब्लॉक में हैं। प्रत्येक क्लस्टर में 150 किसान जुड़े हैं जिन्हे कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण दिलाया जा रहा। खेती करने वाले किसानों को नियमित प्रशिक्षण, वर्मी बेड, जैविक सामग्री बनाने का तरीका और सरकारी सहायक तकनीकी टोल किट मिलते हैं।

सारांश  

प्रयागराज में 3,000 बीघा जमीन पर जैविक खेती की शुरुआत एक महत्वपूर्ण और लाभदायक कदम है। यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के साथ-साथ मिट्टी और पर्यावरण को भी बचाने में सक्षम साबित हो सकती है। यदि ₹4,000 प्रति एकड़ के प्रोत्साहन और जैविक मंडी जैसी बुनियादी संरचनाएं सुचारू रूप से काम करें। यह योजना निरंतर कृषि और किसानों के आर्थिक उत्थान की दिशा में एक बड़ी प्रगति है, जिसमें अनुदान, प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा शामिल हैं। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव बहुत बड़ा हो सकता है। 

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