प्रयागराज गोबर हस्तशिल्प इस बात का प्रमाण है की गाय का उपयोग केवल दूध, गोबर और गोबर गैस तक ही सीमित नहीं है। अब यह स्थानिक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक कला साधन के रूप में भी विकसित हो रहा है। प्रयागराज में आशारानी फाउंडेशन की 10 महिलाओं की एक टीम ने इस पारंपरिक सामग्री को आधुनिक कलाकृतियों में ढालकर एक नई दिशा दी है। ये महिलाएं पर्वों पर बढ़ती मांग के कारण धार्मिक मूर्तियों (दुर्गा, राधा-कृष्णा, शंकर-पार्वती, राम दरबार) और दीवार घड़ियाँ, झूमर जैसे सजावट के समान बनाती है। कला
प्रयागराज गोबर हस्तशिल्प: निर्माण प्रक्रिया और सामग्री
गोबर को पहले अच्छी तरह से साफ करके सुखाया जाता है। इसके बाद, ग्वार गम को मोल्ड में मिलाकर उचित आकार दिया जाता है। अब इसे रंगों और पारंपरिक प्रतीकों (जैसे चक्र, स्वस्तिक, “ॐ”) से सजाया जाता है। इस प्रकार बनाए गए उत्पादों में एंटिमाइक्रोबियल गुण होने के कारण वे जैव-अपघटनीय हैं और पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं।
तीव्र बढ़ती मांग और बाजार
प्रयागराज, मथुरा और अयोध्या जैसे धार्मिक शहरों में नवरात्रि और दीपावली के दौरान इन हस्त-कलाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। अब तक पांच सौ से अधिक उत्पाद पैक कर भेजे गए हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और स्थानीय रोजगार सृजन में भी मदद कर रही है।
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प्रयागराज गोबर हस्तशिल्प से पर्यावरणीय और सांस्कृतिक लाभ
प्लास्टिक या रासायनिक सामग्री के बजाय, ये उत्पाद गोबर और गौमूत्र से बनाए गए हैं। ये जैव-विघटनीय हैं और स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को पुनर्जीवित करते हैं, जिससे आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम दिखाई देता है। इससे प्रदूषण कम होता है और त्योहारों में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं की धार्मिक महत्ता भी बनी रहती है।
सरकारी समर्थ और भविष्य की संभावनाएं
उत्तर प्रदेश सरकार के “एक जिला-एक उत्पाद” (ODOP) जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य इन हस्तनिर्मित उत्पादों को बढ़ावा देना है। ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए ये प्रयास सरकार और स्वयं सहायता समूहों की सहायता से तेजी से विकसित हो रहे हैं। प्रयागराज की महिलाओं को सशक्त करने के अलावा, यह मॉडल पूरे क्षेत्र में संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण का उदाहरण बन रहा है।
सारांश
प्रयागराज गोबर हस्तशिल्प जैसी पहल न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे महिलाओं का आत्म-सम्मान भी बढ़ता है। इस तरह की योजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है और त्योहारों को नया, हरित और सांस्कृतिक रंग देती है। इस नवाचार ने प्रयागराज में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाया है।
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