प्रयागराज के अतरसुइया थाना क्षेत्र से एक विशिष्ट लेकिन महत्वपूर्ण तीन तलाक मामला सामने आया है। जहां एक पति ने एक पत्र (चिट्ठी) लिखकर अपनी पत्नी को तीन बार तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देने का दावा किया, इससे बहस और कानूनी लड़ाई शुरू हुई। पत्नी ने दहेज-उत्पीड़न सहित अन्य गंभीर आरोपों के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इस मामले से कानून, समाज और महिलाओं के अधिकारों पर भी बहस हो गई है।
2019 में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार सुरक्षा) अधिनियम के तहत भारत में तीन तलाक को गैर-कानूनी और अपराध घोषित किया गया था। तुरंत तीन बार “तलाक” कहने पर अपराध दर्ज किया जा सकता है।
चिट्ठी से तीन तलाक घटना का विस्तृत विवरण
अतरसुइया थाना क्षेत्र की एक महिला ने अपने पति अशफाक अहमद और उसके ग्यारह साथी के खिलाफ शिकायत की है। उसने दावा किया कि –
- उसका विवाह अशफाक अहमद से अक्टूबर 2015 में हुआ था।
- शादी के बाद ससुराल वाले कम दहेज को लेकर उसे उत्पीड़ित करते रहे।
- उसके परिवार ने मानसिक तनाव और मार-पीट के अलावा पांच लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की।
- समय के साथ पत्नी को घर से निकाल दिया गया और बेटी की पढ़ाई तथा अन्य खर्च नहीं दिए गए।
- परिवार ने उसकी दूसरी शादी कानपुर में तय भी कर दी।
- परिवार परामर्श केंद्र (सुलह-समझौता) के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
- अगस्त 2023 में पति और उसके दोस्त अली अहमद ने पत्र लिखकर “तीन तलाक” दे दिया, जो चिट्ठी उसे डाक रजिस्ट्री के माध्यम से प्राप्त हुई।
- इस घटना के बाद महिला ने एफआईआर दर्ज कराई और मामले की जांच शुरू हो गई है।
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