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बुधवार, फ़रवरी 18, 2026

प्रयागराज नगर निगम(PMC) की पशु लाइसेंसिंग ने कुत्तों-बिल्लियों के लिए नया नियम लागू किया

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प्रयागराज नगर निगम (PMC) ने अब पालतू पशु अब बिल्लियों और कुत्तों को लाइसेंस देना शुरू कर दिया है। आवासीय क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य की सुरक्षा और आवारा पशुओं की समस्या को नियंत्रित करने के लिए यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम है।

PMC की पालतू पशु लाइसेंसिंग की जानकारी

PMC ने अपने सौ वार्डों में सालाना पालतू पशु लाइसेंसिंग अभियान शुरू किया है। इस अभियान में प्रत्येक पालतू कुत्ते और बिल्ली के लिए सालाना 745 रुपये का लाइसेंस मिलेगा, जो अप्रैल 1 से मार्च 31 तक वैध रहेगा।  लाइसेंसिंग के दौरान पालतू पशु को रेबीज वैक्सीन का प्रमाण देना अनिवार्य है। PMC की सात सदस्यीय टीम जागरूकता अभियान और लाइसेंस जारी कर रही हैं।

यदि मालिक अपने पालतू पशु का लाइसेंस नहीं बनाता या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे दो बार हर महीने नोटिस दिया जाएगा। नोटिस नहीं मानने पर दंड, पशु की जब्ती और फिर FIR दर्ज की जा सकती है। पकड़े गए पशु PMC के शेल्टर होम्स में रहेंगे।  पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में कुत्ता काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण राज्य सरकार ने भी ऐसा करना अनिवार्य कर दिया है। प्रयागराज  में पिछले दो वर्षों में लगभग 2 लाख कुत्ता काटने के मामले दर्ज हुए हैं, और PMC ने दो डॉग शेल्टर होम्स भी बनाए हैं ताकि ऐसे मामले कम हो सकें।

प्रयागराज नगर निगम(PMC) की पालतू पशु लाइसेंस के मुख्य उद्देश्य

पालतू पशुओं की नियमित जांच और टीकाकरण किया जाएगा। आवारा कुत्तों से होने वाली बीमारी और झुंझलाहट को नियंत्रित करना। पालतू पशु मालिकों की जिम्मेदारी बढ़ाना और रेबीज और अन्य रोगों के प्रसार को कम करना है। अब तक इसके अंतर्गत 1,120 से अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं। PMC का अनुमान है कि शहर में लगभग 1.13 लाख अनुमानित कुत्तों की संख्या हैं। जिसमें 5200 टीके लगाए एवं नसबंदी की जा चुकी है।  

स्थानीय पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस कदम से पालतू पशुओं को नियमित टीकाकरण और नसबंदी के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिससे आवारा पशुओं की संख्या कम होगी और उनकी स्वास्थ्य स्थिति सुधरेगी।

सारांश 

प्रयागराज में आवारा पशुओं की समस्या, सार्वजनिक सुरक्षा और पशु स्वास्थ्य के लिए PMC ने पालतू पशु लाइसेंसिंग शुरू की है। इस नीति से पालतू पशु मालिकों को अधिक जिम्मेदारी मिलेगी और आवारा पशुओं से जुड़ी समस्याएं कम होंगी।

प्रयागराज में राष्ट्रीय बर्ड सेंचुरी की योजना कनिहार(झूँसी) में। 

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