महाकुंभ 2025 जो श्रद्धालुओं के एक पावन अनुभव रहा वहीं प्रयागराज की प्रशासनिक क्षमताओं की परीक्षा भी लिया। उसी उत्साह और प्रतिबद्धता को साथ शहर में माघ मेला 2026 की तैयारियाँ अभी से शुरू हो गई हैं। इस बार मेला क्षेत्र को 800 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है, और इसके लिए प्रशासन ने राज्य सरकार को 120 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव भेजा है। साथ ही, संचालन, सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से मेला को क्षेत्रों और उपक्षेत्रों में विभाजित करने की योजना भी बना ली गई है।
माघ मेला 2026: प्रमुख जानकारियाँ
- 2025 के महाकुंभ के अनुभवों से प्रेरित होकर, इस बार प्रशासन मेला क्षेत्र को 800 हेक्टेयर तक बढ़ाना चाहता है। श्रद्धालुओं को अधिक जगह, बेहतर आवास व्यवस्था और अधिक गतिशीलता मिलेगी।
- प्रयागराज प्रशासन ने राज्य सरकार को ₹120 करोड़ का विशेष बजट प्रस्ताव भेजा है, जिसमें बिजली, स्वास्थ्य, पर्यटन और सार्वजनिक सेवाओं में धन विभाजित किया जाएगा।
- 2024 में तुलनात्मक रूप से कम बजट और लगभग 750 हेक्टेयर क्षेत्र का मेला था। अधिकारियों का कहना है कि 2024 में ₹79.8 करोड़ का बजट था, लेकिन 2026 में यह लगभग 40% बढ़कर ₹120 करोड़ था।
- श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए, सेक्टरों की संख्या, पांटून पुल, अस्थायी बसों और ट्रेनों की व्यवस्था की जा रही है।
सेक्टरों का विभाजन और प्रबंधन
हर सेक्टर को सुरक्षा और पर्यटक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए दो उप-सेक्टरों (जैसे सेक्टर 1A और 1B) में विभाजित करने की योजना है। इससे मार्गदर्शन, आपातकालीन प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण में सुधार होगा।
इस विभाजन के दौरान हर क्षेत्र की निगरानी, स्वच्छता, बिजली-पानी और चिकित्सा सुविधाओं की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
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परिवहन व बस सेवा
UPSRTC (यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम) ने पहले से ही योजना बनाई है कि मेला के दौरान लगभग 3,000 बसों की व्यवस्था होगी। आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए इनमें से 200 बसें रिजर्व रखी जाएगी।
यह कदम मेला समय में भीड़ के दबाव को कम करने और श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाने के लिए सहायक एवं जरूरी माना जा रहा है।
सारांश
माघ मेला 2026 की तैयारियाँ अभी प्रारंभिक चरण में हैं, लेकिन आकांक्षा बड़ी है। 800 हेक्टेयर क्षेत्र का विस्तार, ₹120 करोड़ का प्रस्ताव और सेक्टरों में विभाजन सब यह बताते हैं कि प्रशासन इसे महाकुंभ की तरह कार्यक्रम बनाने की सोच रहा है।
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