उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) का अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय नें पदभार संभालने के सिर्फ एक साल बाद इस्तीफा दे चुकी हैं। राज्य सरकार ने उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है, और आयोग का वरिष्ठ सदस्य अस्थायी तौर पर अध्यक्ष बन गया है। इस अप्रत्याशित कदम ने आयोग की कार्यप्रणाली और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अध्यक्ष कीर्ति पांडेय का इस्तीफा की पुष्टि एवं पृष्ठभूमि
आधिकारिक आदेश के अनुसार, प्रो. पांडेय ने 22 सितंबर 2025 को इस्तीफा दे दिया। उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव गिरिजेश त्यागी ने एक अधिसूचना जारी की है जिसके अनुसार नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक वरिष्ठतम सदस्य आयोग का कामकाज देखेंगे।
इस्तीफे का कारण उन्होंने आधिकारिक रूप से व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है। किंतु सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिक दबाव, अधूरी प्रक्रियाओं और अभ्यर्थियों की नाराज़गी ने भी इस्तीफे को प्रेरित किया। 2022 की लंबित TGT-PGT भर्ती उनके कार्यकाल में पूरी नहीं हुई। नई भर्ती की तिथियाँ कई बार घोषित हुईं, लेकिन बार-बार टाली गई। परीक्षार्थियों ने आयोग की पारदर्शिता और समयसीमा पर सवाल उठाए। भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी से अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ा है।
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कार्यकाल और नियुक्ति
- 1 सितंबर 2024 को प्रो. पांडेय को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
- वह मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली हैं और गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुकी हैं। 2011 से 2014 तक समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख और 2015 से 2017 तक यूजीसी के मानव संसाधन विकास केंद्र के निदेशक रहीं।
- पदकाल अभी लंबा था, लेकिन एक साल में पद छोड़ने से यह बात चर्चा में है।
सारांश
प्रो. कीर्ति पांडेय का इस्तीफा केवल एक पद परिवर्तन नहीं है; यह लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को भी प्रभावित करता है। सरकार के सामने चुनौती है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति शीघ्र और प्रभावी तरीके से की जाए ताकि भर्ती प्रक्रिया बाधित न हो। अब देखना होगा कि नया नेतृत्व आयोग पारदर्शिता और स्थिरता से कैसे आगे बढ़ाता है।
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