जैसे-जैसे गंगा-यमुना की बाढ़ का पानी उतर रहा है, वैसे-वैसे प्रयागराज में मच्छरजनित बीमारियों का संकट बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने हालात की गंभीरता को समझते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरों के खात्मे के लिए चौकसी और मॉनिटरिंग बढ़ा दी है ताकि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की महामारी फैलने से बच जाए। प्रयागराज में बाढ़ के बाद डेंगू मच्छर नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग एवं चौकना होकर कार्य कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति: कैसे हो रहा प्रयागराज में बाढ़ के बाद डेंगू-मच्छर नियंत्रण
- डोमेस्टिक ब्रीडर चेकर (DBC) टीमों का गठन: 58 DBC तैनात हैं, जिनका मुख्य कार्य बाढ़-ग्रस्त क्षेत्रों में पानी के जमा होने और मच्छरों की उत्पन्न की जांच करना है।
- घर-घर जांच: 71,200 घरों में जांच करने के दौरान, 6,800 जगह मच्छरों के लार्वा मिले और नष्ट किए गए, जिसमें कूलर, बाल्टी, फूलदान, फ्रिज ट्रे, टायर और अन्य सामान शामिल थे।
- अँटी-लार्वा स्प्रे और फॉगिंग: हर दिन 18 कर्मचारियों की एक टीम प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव और फॉगिंग करती है।
- सभी घरों की जांच का उद्देश्य: 30 सितंबर तक, विभाग का लक्ष्य सभी कम ऊँचाई वाले बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों के घरों की सफाई और निगरानी करना है।
- शहर को सात क्षेत्रों में विभाजित किया गया: जैसे-जैसे पानी कम होता गया, टीमों ने शिवकुटी, राजापुर, सलोरी, गंगा नगर, बेली गाँव, छोटा-बघाड़ा और बड़ा-बघाड़ा आदि इलाकों में व्यापक अभियान चलाया।
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बाढ़ के बाद का हेल्थ रिस्क क्यों बढ़ा?
- साल 2025 में गंगा-यमुना की बाढ़ ने प्रयागराज के कई मोहल्ले और 5000 से अधिक परिवारों को नुकसान पहुँचाया।
- जैसे-जैसे जल स्तर घटता गया, घरों-बस्तियों में गंदा पानी और कीचड़ जमा होते जा रहे हैं, जो मच्छरों की प्रजनन के लिए अनुकूल है।
- साथ ही डेंगू के मामले बढ़ने की आशंका भी रहती है; 1 जनवरी से 15 सितंबर तक 30 डेंगू केस दर्ज हुए हैं, जिनमें से सबसे हाल का केस बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से था।
सारांश
प्रयागराज में बाढ़ के बाद डेंगू-मच्छर नियंत्रण के लिए जल्द ही स्वास्थ्य विभाग ने सख्त और सक्रिय कार्रवाई शुरू की। डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए घर-घर चेकिंग, एंटी-लार्वा स्प्रे, फॉगिंग और जन-जागरूकता का उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन अब भी हर मोहल्ले में निगरानी करने और नागरिकों का सहयोग सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
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