परिचय
जब हम प्रयागराज की बात करते हैं, तो अक्सर संगम, कुंभ और आध्यात्मिकता की छवि सामने आती है। लेकिन इसी शहर में इलाहाबाद संग्रहालय है, जो इतिहास, कला और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज़ है। यह संग्रहालय न सिर्फ ऐतिहासिक वस्तुओं को सहेजता है, बल्कि हमें हमारी विरासत से भी जोड़ता है।
इलाहाबाद संग्रहालय का इतिहास
इलाहाबाद संग्रहालय की नींव 1863 में डाली गई थी। लेकिन एक संस्था के रूप में इलाहाबाद संग्रहालय की स्थापना 1931 में अंग्रेजी शासनकाल में की गई थी। प्रारंभ में यह संग्रहालय पब्लिक लाइब्रेरी भवन का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन इसके महत्व को देखते हुए 1947 में इस भवन में स्थानान्तरित किया गया। सन् 1985-86 में संग्रहालय को ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ भी घोषित किया गया।
भारत के पहले प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू स्वयं इसके विकास में दिलचस्पी रखते थे। उन्होंने ही 1947 में इसकी आधारशिला रखी थी जो 1954 में आम लोगों के लिए खोल दिया गया। उनके लिखे हुए पत्र और योगदान आज भी यहां संग्रहीत है।
इलाहाबाद संग्रहालय की वास्तुकला
संग्रहालय का भवन अल्फ्रेड पार्क के हरे-भरे परिसर में स्थित है, जो “वास्तु और प्रकृति” का सुंदर मेल है। इलाहाबाद संग्रहालय की वास्तुकला में पारंपरिक सौंदर्य और आधुनिक भारतीय का सुंदर मेल है। प्राकृतिक रोशनी और हवादार गलियारों के साथ यह भवन सादगी, व्यावहारिकता और भव्यता का उदाहरण है। सौर ऊर्जा, केंद्रीय प्रांगण, थीम आधारित गैलरी और हरे-भरे लॉन इसे विशेष बनाते हैं। यहाँ क्लासिकल भारतीय स्थापत्य के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं हैं, जिससे यह इमारत यात्रियों को आंतरिक शान्ति और दृश्य आनंद का अनुभव भी देती है।

इलाहाबाद म्यूजियम की प्रमुख गैलरियाँ और उनके अनोखे संग्रह
इलाहाबाद संग्रहालय में कुल 16 गैलरियां हैं, जिनमें विभिन्न विषय अनुसार संग्रह शामिल हैं। जिनमें से कुछ प्रमुख हैं –
गांधी गैलरी:
यहां महात्मा गांधी से जुड़ी हस्तलिखित चिट्ठियाँ, उनके उपयोग की वस्तुएं और दुर्लभ चित्र प्रदर्शित हैं। राष्ट्रपिता के जीवन और विचारों से यह गैलरी परिचित कराती है।
गुप्तकालीन गैलरी:
इसमें सम्राट समुद्रगुप्त की मूर्तियाँ, सिक्के, शिलालेख और ‘प्रयाग प्रशस्ति’ जैसे ऐतिहासिक अवशेष शामिल हैं। इससे प्रयागराज की गुप्तकालीन महत्व दिखाई देता है।
स्वतंत्रता संग्राम गैलरी
यहाँ पंडित नेहरू, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस और अन्य लोगों के साथ 1857 से 1947 तक हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ वस्तुएं रखी गईं हैं।
आदिवासी और लोक संस्कृति गैलरी:
यहाँ देश भर की विविध आदिवासी कला, लोक वेशभूषा और सांस्कृतिक वस्तुओं को चित्रित किया गया है।
चित्रकला और मूर्तिकला संग्रह:
प्राचीन भारतीय मूर्तिकला की उत्कृष्ट प्रतियां के अलावा अमृता शेरगिल और राजा रवि वर्मा जैसे महान कलाकारों के चित्र प्रमुख हैं। इसमें मुगल, राजस्थान, बंगाल और कंपनी शैली की चित्रकला भी शामिल है।
रॉक आर्ट गैलरी: 14,000 ईसा पूर्व की प्रागैतिहासिक चित्रकला को प्रदर्शित किया गया गया। ऐसा संग्रह भारत में और कहीं नहीं देखने को मिलता।
अनूठी प्रदर्शनी
- गाँधी स्मृति वाहन: उस ऐतिहासिक वैन को देखना दुर्लभ अनुभव है, जिसमें बापू की अस्थियाँ संगम तक ले जाई गई थीं।
- चंद्रशेखर आज़ाद की पिस्तौल: आज़ादी के दीवाने से जुड़ी वस्तु को देखना एक प्रेरणादायक क्षण है।
- निकोलस रोरिक हॉल: यहाँ विश्व प्रसिद्ध रूसी चित्रकार की 19 पेंटिंग्स देखने को मिलती हैं।

Allahabad Museum की विशेष संग्रह और दुर्लभ वस्तुएँ
इलाहाबाद संग्रहालय में मौजूद महत्वपूर्ण और दुर्लभ संग्रह का एक स्पष्ट चित्रण देखने को मिलता है। यहां पर भगवान बुद्ध की 2,300 वर्ष पुरानी प्रतिमा, अशोक कालीन स्तंभ शिलालेख की प्रतिकृति, आर्य और ब्रह्म समाज से जुड़ी धरोहरें, दुर्लभ पांडुलिपियाँ और हस्तलिखित ग्रंथ मौजूद हैं।
पांडुलिपियाँ और हस्तलिखित ग्रंथों में 25,000 से अधिक पुस्तकों और अनमोल प्राचीन ग्रंथों का संग्रह है। इसके अलावा, यहाँ कई विशिष्ट कला सामग्री, स्वतंत्रता संग्राम के पत्र-व्यवहार और राष्ट्रीय साहित्यकारों के दस्तावेज़ उपलब्ध हैं।
शोध, संरक्षण और शैक्षणिक भूमिका
इलाहाबाद संग्रहालय सिर्फ एक प्रदर्शनी स्थल नहीं है। यह एक शोध केंद्र भी है, जहाँ विद्यार्थी, पुरातत्वविद् और इतिहासकार लगातार शोध कार्य करते हैं। संग्रहालय का आर्काइव(अभिलेख या पूरालेख) और लाइब्रेरी भी ऐतिहासिक अध्ययन के लिए अमूल्य स्रोत हैं।
यहाँ नियमित रूप से कला प्रतियोगिता और शैक्षणिक टूर करवाया जाता हैं। यह प्रयास बच्चों को इतिहास में रुचि जगाने के लिए किया जाता है।

स्थान और Allahabad Museum कैसे पहुँचें
चंद्रशेखर आज़ाद पार्क, कमला नेहरू रोड, जॉर्ज टाउन, प्रयागराज। इसकी दूरी प्रयागराज जंक्शन से लगभग 5 किमी तो प्रयाग स्टेशन से 2 किमी और रामबाग स्टेशन से 3 किमी है। वहीं बमरौली हवाई अड्डा से यहां की दूरी 12 किमी है। स्थानीय रास्तों के द्वारा ऑटो/ई-रिक्शा आसानी से पहुँच सकते हैं।
इलाहाबाद संग्रहालय की टाइमिंग और शुल्क
भारत का पहला पूर्णतः सौर ऊर्जा से संचालित संग्रहालय है। यह संग्रहालय मंगलवार से रविवार सुबह 10:30 से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है। सोमवार एवं राष्ट्रीय अवकाश में संग्रहालय बंद रहता है। प्रवेश शुल्क भी यहां पर निर्धारित है। भारतीय नागरिकों के लिए 20-50 रुपया जबकि विदेशी नागरिकों के लिए 200-50 रुपया है।
निष्कर्ष
इलाहाबाद संग्रहालय सिर्फ पुरानी वस्तुओं का घर नहीं, बल्कि हमारे वो सवाल जिनके जवाब सिर्फ इतिहास ही दे सकता है। यहाँ की गैलरी आपको गुजरे वक्त में ले जाती है और हर संग्रहित वस्तु से बातचीत करती है। अगली बार प्रयागराज जाते समय, इस संग्रहालय को देखना न भूलें!
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