रोजमर्रा की भागदौड़ में प्रयागराज की सड़कों पर लोग ट्रैफिक नियमों को अनदेखा कर रहे हैं। नवंबर में ट्रैफिक जागरूकता माह के बावजूद, उल्लंघनों की संख्या बढ़ी, जिससे ट्रैफिक पुलिस को 58,963 चालान काटने पड़े। तीन करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया लेकिन सवाल वही है—क्या ये सख्ती सड़कें सुरक्षित बना पाएगी?
ट्रैफिक उल्लंघन प्रयागराज के आंकड़े
ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के ट्रैफिक जागरूकता माह में पिछले साल के 54,233 चालानों से 4,730 ज्यादा यानी कुल 58,963 चालान जारी हुए। इनमें सबसे ज्यादा 22,121 मामले हेलमेट न पहनने के थे, जिससे करीब 2.21 करोड़ रुपये का फाइन आया। PUC(pollution under control) सर्टिफिकेट न होने पर 3,582 चालान, दोपहिया पर तीन सवारी के लिए 2,672, मोबाइल फोन यूज करते ड्राइविंग पर 211 चालान कटे।
ओवरस्पीडिंग के 146 और प्रेशर हॉर्न के 127 मामले भी दर्ज हुए। अक्टूबर में ही 17,629 चालान हुए, जो बताता है कि समस्या सिर्फ एक महीने तक सीमित नहीं। डीसीपी (ट्रैफिक) नीरज पांडे ने कहा कि जागरूकता अभियान चलाए गए, लेकिन लोग नैतिक जिम्मेदारी नहीं निभा रहे।
बढ़ते चालान का कारण क्या है?
मार्च 2025 से, ट्रैफिक नियमों में संशोधनों के बाद जुर्माने कई गुना बढ़ गए:
- हेलमेट न पहनने पर जुर्माना ₹1,000 तक बढ़ा।
- मोबाइल फोन का उपयोग ₹5,000 से अधिक।
- नशे में गाड़ी चलाने पर ₹10,000 तक आदि।
यह कानून सड़क सुरक्षा को कठोर करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन इसके परिणामों से पता चलता है कि सख्ती के बावजूद लोगों की जागरूकता और आत्म-अनुशासन में कमी आई है, जिससे अधिक चालान हुए हैं।
डेटा से सीख क्या है?
प्रयागराज में 58,963 चालान और 3 करोड़ से अधिक रुपये का जुर्माना दिखाता है कि सड़क नियमों का उल्लंघन अधिक है और कठोर कानून केवल शुरूआत हैं। जनता को यह समझना चाहिए कि नियम सिर्फ दंड के लिए नहीं हैं, बल्कि हमारी और हमारे परिवार की सुरक्षा के लिए हैं।
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