प्रयागराज में हर साल होने वाला माघ मेला धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता का एक ऐसा त्योहार है जो सदियों से भारत के हिंदू समाज में विशेष महत्व रखता है। लेकिन 2026 के माघ मेले में कुछ अलग दृश्य देखने को मिल रहा है। अब इसका लक्ष्य स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं, बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव बनना है।
माघ मेल 2026: ग्लोबल प्रमोशन की भव्य तैयारियां
2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में विश्व भर से लाखों लोग आए थे। लाखों लोगों ने इस आयोजन में संगम देखा, जिससे स्थानीय संस्कृति का प्रचार हुआ और पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ हुआ। अब यही अनुभव माघ मेला 2026 को एक नए स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इस वर्ष के माघ मेले के लिए लगभग ₹95 करोड़ का बजट रखा है, जो मेला को अधिक व्यवस्थित, आकर्षक और विश्वस्तरीय बना देगा। इसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ बेहतर व्यवस्था करना नहीं है, बल्कि “Prayagraj Magh Mela” को विश्व भर से आकर्षित करना है।
महाकुंभ को यूनेस्को ने 2025 में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा देने के बाद, माघ मेला को 2026 में विश्वस्तरीय बनाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि साफ-सफाई, सिक्योरिटी और बिजली-पानी को बिना रुकावट उपलब्ध कराया जाए।
- थीमेटिक सजावट और एलईडी लाइटिंग
- टेंट सिटी संगम के पास (ऑनलाइन बुकिंग)
- हेलीकॉप्टर जॉयराइड
- डिजिटल प्रचार और ग्लोबल ब्रांडिंग
उत्तर प्रदेश सरकार प्रयागराज को ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। महाकुंभ 2025 की सफलता के बाद माघ मेला को अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग देकर 12-15 करोड़ श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की योजना है।
भूले-भटके शिविर ने 73 लोगों को मिलाया परिवार से
पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर माघ मेला 2026 शुरू होते ही लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे थे। इसी बीच, भूले-भटके शिविर के 20 वॉलंटियर्स ने कमाल कर दिखाया। पहले ही दिन 70 वयस्कों और 3 बच्चों समेत 73 बिछड़ों को उनके अपनों से मिला दिया। वॉलंटियर्स ने नए साल से ही काम शुरू कर दिया था और तीन दिनों में 150 से ज्यादा लोगों को मिलाया, जिसमें पहले दिन के 73 शामिल हैं।
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