प्रयागराज में लाइट मेट्रो परियोजना धीरे-धीरे गति पकड़ रही है। यह योजना लंबे समय से रुकी थी, अब इसके लिए जल्द ही ट्रैक और स्टेशन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस योजना में लगभग 100 गांवों की भूमि शामिल होगी। किसानों के लिए उनके जमीन के चार गुना मुवावजा दिए जाने की योजना है। जबकि प्रभावित मकान मालिकों को उनकी संपत्ति का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा।
दो फेज में चलेगी परियोजना
इस लाइट मेट्रो का निर्माण दो चरणों में होगा। पहले चरण में बमरौली एयरपोर्ट से झूंसी सिटी लेक तक लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर 20 स्टेशन बनाए जाएंगे। जैसे बमरौली, शमीम मार्केट, प्रयागराज जंक्शन, सिविल लाइंस, झूंसी, और सिटी लेक फारेस्ट। दूसरे चरण में शांतिपुरम कॉलोनी से छिवकी तक 21 किलोमीटर की दूरी पर 19 स्टेशन बनाए जाएंगे। जिसमें शांतिपुरम, फाफामऊ, एमएनएनआईटी, परेड मैदान, नैनी, और छिवकी स्टेशन होंगे। जिससे पूरे शहर में 44 किलोमीटर का मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाएगा।
मेट्रो काउंसिल का गठन
भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की निगरानी करने के लिए 30 सदस्यों की मेट्रो काउंसिल बनाई जाएगी। प्रमुख सचिव नगर विकास, राज्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी इस काउंसिल में शामिल होंगे। काउंसिल की जिम्मेदारी होगी कि परियोजनाओं का प्रभावी ढंग से संचालन हो, भूमि की अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और निर्माण कार्य पूरे हों।
लागत और महत्व
यह परियोजना लगभग 8747 करोड़ रुपये की लागत में बनाई जाएगी। शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने में भी लाइट मेट्रो का महत्वपूर्ण योगदान होगा, जो प्रयागराज के यातायात को भी नियंत्रित करेगा। इससे शहर में जाम की समस्या कम होगी और यात्रियों को तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन मिलेगा।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही भूमि वितरण मुवावजें में तेजी आएगी। लखनऊ में हुई एक विशेष बैठक में परियोजना के मैप, काउंसिल की स्थापना और जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर चर्चा हुई। सेना की जमीन के लिए अनुमति मिलने पर परियोजना को और भी तेजी मिलेगी। मेट्रो के लिए चुनी गई जगहों में स्टेशन बस स्टेशन की तरह छोटे और आधुनिक होंगे, ताकि कम जगह में अधिक लोगों को सेवा दे सकें।
फाफामऊ पुल की मरम्मत की वजह से 1-15 सितम्बर तक रहेगा बंद।

