प्रयागराज बाढ़ अलर्ट, गंगा-यमुना में पुनः जलवृद्धि
यमुना और गंगा नदियों का जलस्तर प्रयागराज में फिर से बढ़ने लगा है। हथिनी कुंड बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से यमुना नदी का जलस्तर 80.90 मीटर के करीब पहुंच चुका है। जिससे बाढ़ का खतरा फिर से मंडराने लगा है। प्रशासन ने सभी विभागों को अलर्ट मोड पर सतर्क रहने के निर्देश दिये हैं, ताकि किसी भी स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
गंगा-यमुना में जलस्तर वृद्धि का कारण
हैथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ा गया: उत्तराखंड और पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश होने से हैथिनी कुंड बैराज से लगभग 2,38,751 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो आने वाले चार-पाँच दिनों में प्रयागराज पहुँचेगा। इससे यमुना का जलस्तर लगभग एक मीटर ऊपर उठ सकता है।
गंगा में बढ़ोतरी: कानपुर बैराज से गंगा में भी 3.77 लाख क्यूसेक पानी आ रहा है। जिससे गंगा नदी के भी जलस्तर में वृद्धि होगी।
गंगा-यमुना जलस्तर में पुनः वृद्धि से प्रभाव
- कछारी इलाकों में चिंता बढ़ी है: निचले इलाकों जैसे बघाड़ा, राजापुर और नेवादा में एक बार फिर घर से सामान ऊपर मंजिलों पर स्थानांतरित करने की शुरुआत हो गई है।
- भविष्य की योजना बचाव के लिए: प्रशासन द्वारा फिर से अलर्ट जारी किए जाने के बाद बहुत से परिवारों ने खुद-से-ऑर्गनाइज्ड तैयारी शुरू कर दी है।
- पिछले कुछ महीनों में बार-बार बाढ़ की स्थितियां बनी हैं, इसलिए प्रशासन पहले से ही सावधान है। जब गंगा-यमुना का जलस्तर खतरे के निशान (लगभग 84.73 मीटर) के करीब पहुँचता है, तो जिलाधिकारी और विभाग तुरंत कार्रवाई करते हैं। यह क्रम जारी है और इस बार भी बैराज से पानी बाहर निकलने की चिंता बढ़ा दी है।
सारांश
यह पुनः बढ़ता गंगा-यमुना का जलस्तर सतर्कता का संकेत है। स्थानीय लोग भौतिक और भावनात्मक रूप से सतर्क हैं, जबकि प्रशासन ने अलर्ट जारी कर तैयारियाँ तेज कर दी हैं। यह गंगा-यमुना की बाढ़ इस बार कितनी खतरनाक होगी, अगले कुछ दिनों में मानसून की सक्रियता और ऊपर की बारिश से निर्धारित होगा।
प्रयागराज-मिर्जापुर 4 लेन सड़क बनाने का है प्रस्ताव।

