प्रयागराज के फाफामऊ पुल या चंद्रशेखर पुल की मरम्मत का लंबित मामला आखिरकार 1 सितंबर 2025 से शुरू होने जा रहा है। इस पुल की लंबाई करीब एक किलोमीटर है और यहाँ से रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना होता हैं। इसलिए इसकी मरम्मत का असर शहरवासियों के दैनिक जीवन पर सीधे पड़ेगा।
मरम्मत की जरूरत और कारण
पुल के 22 एक्सपेंशन ज्वाइंट्स में से पांच ज्वाइंट्स और उनके बेयरिंग लंबे समय से क्षतिग्रस्त थे। इन खामियों की वजह से गड्ढे पड़ गए थे, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। भारी वाहनों के दबाव से पुल की हालत खराब हो गई थी, इसलिए अब ये मरम्मत आवश्यक है।
मरम्मत अवधि और बंदी का प्रभाव
1 सितंबर से 15 सितंबर तक, पुल पूरी तरह से वाहनों के लिए बंद रहेगा। प्रशासन के अनुसार, मरम्मत काम पूर्ण सुरक्षा के साथ किया जाएगा, जिससे पुल की दीर्घकालीन मजबूती सुनिश्चित हो सके। इस दौरान सड़क परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी एकजुट होकर ट्रैफिक डायवर्जन को नियंत्रित कर रहे हैं।
वैकल्पिक मार्ग
मरम्मत के कारण फाफामऊ पुल से गुजरने वाले सभी लोगों को वैकल्पिक रास्ता लेना होगा। इसके लिए मुख्य वैकल्पिक मार्गों में शास्त्री पुल, झूंसी पुल और सहसों क्षेत्र से होकर आना-जाना पड़ेगा। इन मार्गों पर यात्रियों को लगभग 40 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी।
वित्तीय प्रावधान
लोक निर्माण विभाग ने पुल की मरम्मत के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को लगभग छह करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अभी तक इस बजट को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। फिलहाल, प्रशासन को सीमित मरम्मत के लिए पंद्रह दिनों का पूर्ण अवकाश दिया गया है।
भविष्य की योजना
नया सिक्स लेन ब्रिज भी बनाया जा रहा है, जो पूरा होने पर फाफामऊ पुल की ट्रैफिक समस्या को स्थायी रूप से हल करेगा। यह नया ब्रिज लगभग 10-11 किलोमीटर लंबा होगा और शहर के प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ते हुए आने-जाने का समय काफी कम करेगा।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी देगा मालिनी अवस्थी को मानद उपाधि।

