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बुधवार, फ़रवरी 18, 2026

प्रयागराज में बाढ़ का संकट अभी खत्म नहीं, 1175 लोग अब भी राहत शिविरों में

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प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने के बाद भी बाढ़ का संकट पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। शहर और आसपास के कई क्षेत्रों में हालात गंभीर बनी हुई है। यद्यपि प्रशासन की निरंतर सफाई और राहत प्रयास जारी है। लेकिन अभी भी प्रभावित लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जानिए प्रयागराज बाढ़ अपडेट से जुड़ी ताजा खबर।

प्रयागराज बाढ़ अपडेट: गंगा-यमुना का जलस्तर नीचे, लेकिन समस्या बरकरार

बीते दिनों यमुना और गंगा का जलस्तर खतरनाक स्तर ऊपर बह रहा था, जिससे सैकड़ों गांव और शहरी इलाके जलमग्न हो गए। फिलहाल, दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है, लेकिन बाढ़ का प्रभाव समाप्त होने में अभी समय लगेगा।

बाढ़ के बाद की चुनौतियां: स्वास्थ्य और सफाई संकट

  • अब भी लगभग 1,175 लोग घर लौट नहीं पाए हैं; ये सिर्फ राहत शिविरों में ठहरे हुए हैं।
  • शहर के कई इलाकों जैसे छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, सालोरी, गोविंदपुरी आदि में बाढ़ के बाद गंदगी और बदबू की समस्याएं पैदा हो गई हैं।
  • गंदगी, जलभराव और दुर्गंध से संक्रमण, डेंगू, मलेरिया के अलावा अन्य जलजनित रोगों का खतरा हो सकते हैं।
  • प्रशासन ने सफाई की कार्रवाई शुरू कर दी है, और नगर निगम की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में कचरा हटाने और डिसिन्फेक्शन(रोगाणुनाशन) करने में लगी हुई हैं।

प्रशासन की जिम्मेदारी और स्थानीय प्रतिक्रिया

बाढ़ राहत शिविरों में पीने का पानी, भोजन, प्राथमिक चिकित्सा और दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में राहत सामग्री की कमी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासन की टीमें लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं और पुनर्वास शुरू किया गया है।

राहत शिविरों में रह रहे लोगों का कहना है कि उन्हें घर लौटने के बाद भी आर्थिक सहायता और साफ-सफाई में सहयोग चाहिए। बाढ़ ने कई परिवारों को भोजन और आवश्यक सामान खो दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पशुधन और फसल को भारी नुकसान हुआ है।

प्रयागराज बाढ़ अपडेट: नदियों का जलस्तर 

  • गंगा नदी (फाफामऊ) :  गंगा नदी का जलस्तर लगभग 83.44 मीटर (खतरे का निशान 84.73 मीटर) से नीचे आ चुका  है। 
  • जबकि गंगा नदी (छतनाग) में लगभग 82.45 मीटर पर प्रवाहित हो रही है। 
  • यमुना नदी (नैनी) : वहीं यमुना नदी भी अपने खतरे के निशान से नीचे लगभग 82.99 मीटर पर प्रवाहित हो रही है। 

प्रयागराज के मेजा में आयोजित हो रहा दो दिवसीय बोलन मेला। 

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