10 नवंबर 2025 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए भयानक कार बम धमाके ने पूरे देश को झकझोर दिया। अब इस आतंकवादी हमले की जांच प्रयागराज तक पहुंच गई है, जहां आरोपी डाक्टर शाहीन के व्यक्तिगत और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की जा रही है। लाल किला ब्लास्ट जांच कार्रवाई से प्रकरण में नई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिलने की उम्मीद है, जो मामले की गहराई में जाने का रास्ता खोलगी।
लाल किला ब्लास्ट जांच प्रकरण का विस्तृत विवरण
दिल्ली, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में अभी भी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य सुरक्षा निकाय जांच कर रहे हैं। जांच में यह सामने आया है कि डा. शाहीन का नाम उस “व्हाइट कॉलर” आतंकवादी मॉड्यूल से जुड़ा है जिसने इस धमाके की योजना बनाई थी।
डॉ. शाहीन के शैक्षणिक रिकॉर्ड्स प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू सरकारी मेडिकल कॉलेज में पूरी तरह से जांचे गए हैं। यह पता लगाने के लिए कि उनके शिक्षण और गतिविधियों का इतिहास आतंकवादी घटनाओं से किस तरह जुड़ा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, डा. शाहीन ने यहाँ एमबीबीएस(1996-2002) और एमडी(2006) की डिग्री प्राप्त की थी। जांच एजेंसियां उनके अध्ययन और कामकाज के दौरान मिले कागजात, कॉन्टैक्ट्स और अन्य जानकारी को देख रहे हैं।
इस धमाके में 13 लोग मारे गए और कई घायल हुए थे। शुरुआती जांच में पता चला कि धमाका “सहज प्रभाव से” हुआ हो सकता है, क्योंकि उक्त मॉड्यूल एक बड़े, सुनियोजित हमले को अंजाम देने वाला था।
घटना का पृष्ठभूमि
शहीन के ऊपर आरोप है कि वह जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तान आधारित महिला विंग से जुड़ी थीं। उन्होंने कई सहयोगियों के साथ मिलकर देश भर में इस आतंकवादी नेटवर्क को फैलाने का प्रयास किया। पंजाब, जम्मू और अन्य क्षेत्रों में छापों से कई संदिग्ध गिरफ्तार किए गए हैं।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि प्रयागराज की सरकारी मेडिकल कॉलेज से उनका संबंध इस मामले की जांच को और अधिक व्यापक बनाता है।
सारांश
लाल किले के सामने हुए धमाके की जांच अब प्रयागराज तक पहुंच चुकी है और डॉ. शाहीन के दस्तावेजों के आने से जांच का रुख स्पष्ट होने लगा है। कई राज्यों की सहयोगी एजेंसियां मिलकर यह मामला सुलझा रही हैं, यह केवल एक आतंकवादी घटना नहीं है, बल्कि एक संगठित साजिश का एक भाग है।

