स्कूल के पाठ्यक्रम से बाहर, बच्चों को अब विज्ञान और तकनीक की दुनिया में रचनात्मकता और प्रत्यक्ष प्रयोग का अनुभव मिलेगा। IIIT-इलाहाबाद नवाचार केंद्र क्लासरूम को एक “इनोवेशन लैब” बनाने का लक्ष्य है। इस लैब में विद्यार्थियों को डिजिटल सॉल्यूशन्स बनाने, मशीन लर्निंग का अभ्यास करना, रोबोटिक मॉडल बनाना और थ्योरी का अभ्यास करना सिखाया जाएगा।
IIIT-इलाहाबाद नवाचार केंद्र में किस तरह की होगी ट्रेंनिंग
कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, डेटा साइंस, AR/VR, डिजाइन थिंकिंग और ड्रोन ऑपरेशन में हैंड्स ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी। ड्रोन उड़ाना, रोबोट बनाना, कंप्यूटेशनल थिंकिंग, साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रोटोटाइपिंग विशेषज्ञों से सिखाया जाएगा।
विद्यार्थियों को मॉडल बनाने, लैब उपकरण चलाने, टेक-आधारित समस्या समाधान करने और असली दुनिया के परियोजनाओं में मार्गदर्शन कराना है। वरिष्ठ संकाय की देखरेख में तकनीकी मेंटरशिप दी जाएगी।
प्रशिक्षण के खास पक्ष
बच्चों को डिजिटल इंटरएक्शन, मशीन लर्निंग एल्गोरिदम, डेटा एनालिटिक्स और आंखों देखा ज्ञान सिखाया जाता है। प्रैक्टिकल एक्टिविटी सेंटर में सॉल्विंग स्किल, नवाचार, टीमवर्क और लीडरशिप को बढ़ावा देती है।
IIIT-इलाहाबाद नवाचार केंद्र क्यों जरूरी है ऐसा सेंटर?
- भारत सरकार ने NEP-2020 (नेशनल एजुकेशन पॉलिसी) को लागू करके डिजिटल युग में तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर दिया है, जिससे भविष्य की पीढ़ी तकनीकी रूप से सक्षम बन सकेगी।
- IIIT-A का नवाचार केंद्र इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा, रिसर्च, वर्कशॉप और हैंड्स ऑन प्रोजेक्ट्स (STEM) के लिए राष्ट्रीय हब।
- बच्चों को अलग-अलग स्किल और एक्सपोजर देने के लिए सेंटर में इंडस्ट्री पार्टनरशिप, कैप्सटोन प्रोजेक्ट्स और सर्टिफिकेशन कोर्स भी शुरू किए जा रहे हैं।
सारांश
प्रयागराज क्षेत्र में स्कूलों की छवि IIIT-इलाहाबाद नवाचार केंद्र से बदलने वाली है। बच्चों को व्यावहारिक तकनीकी ज्ञान, उद्यमशीलता और वैज्ञानिक सोच की शिक्षा दी जाती है। स्कूल स्तर के विद्यार्थियों को व्यावसायिक और तकनीकी दुनिया से जोड़ने की यह कोशिश उन्हें सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि क्षमता भी देती है।
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