प्रयागराज के विकास मानचित्र पर एक और मील का पत्थर जोड़ा जाएगा। 1,400 मीटर लंबी हंडिया के लाक्षागृह (लौकहीघाट) से मेज़ा के परानीपुर उपरहा तक बनने वाले दो-लेन पुल का सर्वे राज्य ब्रिज कॉर्पोरेशन ने पूरा कर लिया है। दस वर्षों से लंबित हंडिया-मेजा पुल सपना अब सच होने के करीब है।
हंडिया-मेजा पुल परियोजना की मुख्य जानकारी
- परियोजना का अनुमानित खर्च: 350 करोड़ रुपये
- कार्य करने वाली संस्था: उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की प्रयागराज शाखा
- सर्वे पूरा करने के लिए आवश्यक समय: एक महीने से कम
- Detailed Project Report (DPR) लखनऊ मुख्यालय को भेजा गया है।
- पुल से जुड़ने वाले प्रमुख गाँव लाक्षागृह, पृथ्वीपुर, मुगलिया, दुल्लापुर (हंडिया साइड) और परानीपुर उपरहा (मेज़ा साइड)।
- राज्य सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक रोहित कुमार मिश्रा ने बताया कि “सरकारी स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।”
वर्तमान स्थिति और समस्या
हंडिया और मेज़ा के बीच अभी कोई स्थायी पुल नहीं है, इसलिए हर साल तीन अस्थायी पोंटून पुल बनाए जाते हैं।
- सैदाबाद-सिरसा
- दुमदुमा-लकटहा घाट
- तेला-मदरा मुकुंदपुर घाट
ये पुल गंगा दशहरा के बाद हटा दिए जाते हैं, जिससे लोग बरसात में नावों पर निर्भर रहते हैं। इन अस्थायी पुलों के निर्माण और रखरखाव में सरकार को हर साल लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करना होगा।
सारांश
हंडिया-मेज़ा गंगा पुल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि एक लंबे इंतज़ार का समाधान है। यह प्रयागराज के ग्रामीण इलाकों के लिए आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जीवन का प्रतीक बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकारी स्वीकृति कब मिलती है और यह सपना कब धरातल पर उतरता है।
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