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सोमवार, अप्रैल 20, 2026

‘Drone Didis’ पहल – महिलाएं खेती में छिड़का रही तकनीक का संचार

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किसानों की मेहनत, सुबह की ताजी हवा, और फिर… उड़ते हुए ड्रोन की गूँज?  प्रयागराज की ग्रामीण महिलाओं के तकनीकी उपयोग से खेती को आसान बनाया है। ‘Drone Didis’ पहल नें महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय खोला है।

‘Drone Didis’ पहल की जानकारी 

द्वितीय चरण की शुरुआत: राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) की “ड्रोन सक्खी” योजना के तहत प्रयागराज में नौ और महिलाओं को ड्रोन संचालन प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। यह प्रशिक्षण प्रमाणित ड्रोन ऑपरेटर बनाने के लिए किया गया है। 15 महिलाएं पहले चरण में प्रशिक्षित हो चुकी हैं; अब कुल संचालक 24 हैं।

प्रशिक्षण योजना: प्रशिक्षण में पांच दिन मूल ड्रोन ऑपरेशन और दसवीं दिन विशेष कृषि अनुप्रयोग शामिल हैं। प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रत्येक महिला को 80% सब्सिडी पर 10 से 15 गांवों की सेवा के लिए ड्रोन आवंटित किया जाता है।

राजनीतिक अभिव्यक्ति: “मेरा मन की बात” कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन “Drone Didis” को भारत की ‘आकाश की योद्धा'(sky warriors) कहा और उनकी कृषि में तकनीकी योगदान की प्रशंसा की।

वाराणसी में उपलब्धि: वाराणसी में भी ऐसी पहल हुई जहां नौ महिलाओं ने ड्रोन से 2,581 एकड़ जमीन पर कीट और उर्वरक छिड़ककर ₹3.38 लाख कमाए। Nano urea, nano DAP और अन्य सामग्री के छिड़काव से समय, काम और लागत बच गए।

‘Drone Didis’ पहल की पृष्ठभूमि 

यह कृषि तकनीकी पहल, जिसका नाम है “Namo Drone Didi Scheme“, नवंबर 2023 में शुरू की गई थी और इसका लक्ष्य है 15,000 कृषि सहकारी संस्थाओं (SHG) तक ड्रोन सेवा पहुँचना. इसके लिए ₹1,261 करोड़ का बजट दिया गया है।

IIT मण्डी, IIT गुवाहाटी और अन्य संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। DGCA-मान्यता प्राप्त रिमोट पायलट सर्टिफिकेट भी महिलाओं को मिल रहे हैं।

ड्रोन सक्खी योजना के लाभ

महिला सशक्तिकरण: इन महिलाओं को पहले केवल गृहिणी थीं, लेकिन अब गांव में ‘पायलट दीदी’ का दर्जा प्राप्त है।  उनका सामाजिक सम्मान और आत्मनिर्भरता बढ़ा है।

आर्थिक लाभ: वाराणसी की महिलाओं ने आर्थिक लाभ प्राप्त किया; इससे ₹3.38 लाख की कमाई प्रमाणित होती है।

योग्य कृषिविकास: ड्रोन तकनीक से खेतों की स्वास्थ्य और सुरक्षा में सुधार हुआ, साथ ही समय, श्रम और कीटनाशक की मात्रा की बचत हुई।

सारांश

‘Drone Didis’ पहल सिर्फ कृषि की तकनीकी विकास की कहानी नहीं है। यह महिलाओं को ऊँचाइयां छूने का अवसर प्रदान कर रही है, पारंपरिक समाज में उनका स्थान बदल देती है और पूरी गाँव की अर्थव्यवस्था को नया आयाम देती है।

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