प्रयागराज का नाम सुनते ही धार्मिक और ऐतिहासिक छवि उभर कर सामने आती है। यह एक पार्क नहीं बल्कि पौराणिकता और प्रकृति का संगम है। ऐसा कहा जाता है यह ऋषि भारद्वाज का आश्रम हुआ करता था जो तपस्या और शिक्षा प्रदान करते थे। आइए इस लेख में जानते है भारद्वाज पार्क प्रयागराज के बारें में –
पौराणिक कथा और भारद्वाज ऋषि का महत्व
इस पार्क का नाम उस महान ऋषि भारद्वाज के नाम पर रखा गया है। इनकी विद्वता और ज्ञान का उल्लेख वेद, पुराण, आयुर्वेद, धनुर्वेद और विमान शास्त्र में मिलता है। रामायण के अनुसार जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वन को जा रहे थे तो यहां ठहरे थे। भारद्वाज ऋषि से उन्हे ऋषि भारद्वाज द्वारा पथ-प्रदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। इसलिए यह स्थान ऐतिहासिक होने के साथ धार्मिक रूप से भी खास है।


भारद्वाज पार्क प्रयागराज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह पार्क 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में भारद्वाज पार्क का आकार लेने लगा था। उस समय ब्रिटिश का शासनकाल था और गार्डन तथा ओपन स्पेस विकसित हो रहे थे। इसे बाद में ऋषि के नाम से सजाया गया ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे परिचित हो सके। धीरे-धीरे इसमें पाथवे, बेंच, फूल और फौवारे विकसित किए गए। पार्क के पास महर्षि भारद्वाज की भव्य प्रतिमा दिखती है।
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भारद्वाज पार्क प्रयागराज का लोकेशन और संरचना
जॉर्ज टाउन, प्रयागराज में यह पार्क स्थित है इसके पास में ही आनंद भवन भी है। यह एक पुराना, शांत और प्रसिद्ध क्षेत्र है जो पुराने शैक्षिक संस्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों से घिरा है। हरे-भरे लॉन के अलावा छायादार पीपल-नीम के पेड़, गोलाकार बगीचे, पक्की पगडंडियाँ और बैठने के लिए बेंच हैं।
रोचक तथ्य
- पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि के आश्रम में हजारों शिष्य शिक्षा ग्रहण करते थे। कुछ लोककथाओं में संख्या 10,000 तक बताई जाती है। महर्षि भारद्वाज को यहां का प्रथम नागरिक भी कहा जाता है।
- ऐसा माना जाता है की सरस्वती नदी इसी पार्क के पास से होकर गुजरती थी। जहां शांति और सुरम्यता मन मोह लेती थी। लेकिन धीरे-धीरे नदी यहाँ से प्राकृतिक कारणों से विलुप्त हो गई।
- यहां पर ऋषि भारद्वाज की 32 मीटर की प्रतिमा स्थापित की गई है। जिसका उद्घाटन 2019 में तत्कालिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था।
- बात करें प्रतिमा की तो इसे महेंद्र कोडवानी द्वारा बनाया गया। जो की कांस्य रंग की है।
- भारद्वाज आश्रम में आज भी धार्मिक अनुष्ठान किए जाते है। यहां पर स्थित शिवलिंग को भारद्वाजेश्वर शिवलिंग कहा जाता है।
- पार्क के टाइमिंग की बात की जाए तो सुबह 9 से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। साथ ही इस पार्क में प्रवेश शुल्क भी निर्धारित है।


निष्कर्ष
भरद्वाज पार्क प्रयागराज की उन जगहों में से है जहाँ अतीत और वर्तमान साथ चलते हैं। यह हमें महर्षि भरद्वाज की विद्या, तपस्या को याद दिलाता है, और साथ ही शहर को हरियाली और सुकून भी देता है। भारत की प्राचीन परंपरा और संस्कृति की गहराई को भी महसूस किया जा सकता है।
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