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बुधवार, फ़रवरी 18, 2026

प्रयागराज शंकरगढ़ सिलिका रेत बनी बोतल उद्योग की नई पहचान

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प्रयागराज शंकरगढ़ की रेत खदान अब भारत के शराब उद्योग का नया उम्मीद बन सकती है। यहां की सिलिका रेत अब देशभर में शराब और अन्य पेय पदार्थों की बोतल बनाने में पहली पसंद बन रही है। जिससे जल्दी ही उच्च गुणवत्ता वाली सिलिका रेत की मांग बढ़ने वाली है। 

शंकरगढ़ सिलिका रेत से जुड़ी मुख्य जानकारी 

शंकरगढ़ (प्रयागराज) की बेहतरीन सिलिका रेत अब फिरोजाबाद में शराब की बोतल बनाने वाले उद्योग में पसंद की जा रही है। फिरोजाबाद ग्लास उद्योग, जो लगभग आधी शराब की बोतलों का उत्पादन करता है। पहले यह सिलिका रेत राजस्थान से आयात करता था लेकिन उसकी जगह अब शंकरगढ़ की रेत को अधिक प्राथमिकता देने लगा है। जिसका कारण मुख्यतः इसकी कीमत और वाशिंग प्लांट होने से बेहतर गुणवत्ता का होना है। 

गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में भवन एवं परिवहन के शीशे निर्माण में यह रेत प्रयोग की जाती थी। इसका उपयोग अब ग्लास और बोतल उद्योग में भी होता जा रहा है।  पिछले जून में शंकरगढ़ से 22,000 टन सिलिका रेत बंगाल में इंजन, पिस्टन और चेसिस बनाने के लिए भेजी गई थी।

प्रयागराज शंकरगढ़ सिलिका रेत खदान का इतिहास

शंकरगढ़ की अर्थव्यवस्था कृषि और खनिज पर निर्भर है, जहां एक स्थानीय राजा को 150 वर्ग किमी क्षेत्र में खनिज संपत्ति है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने एक मैग्नेट-आधारित तकनीक बनाई है जो रेत से लौह खनिज निकालने में पानी बचाता है, जिससे खनन पर्यावरण के अनुकूल होता है।

शंकरगढ़ सिलिका रेत खदान से प्रभाव 

स्थानीय रोजगार: खनन, साफ़-सफाई और ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में नए अवसर उत्पन्न होंगे। 

आर्थिक लाभ: खदान मालिकों के अतिरिक्त यहाँ के स्थानीय अर्थव्यवस्था को राजस्व और गति मिलेगी।

औद्योगिक विस्तार: शंकरगढ़ अब एक इंडस्ट्रियल हब बनने की ओर अग्रसर है। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ रहा है।

पर्यावरणीय सोच: नई मैग्नेट टेक्नोलॉजी से जल संरक्षण और पारिस्थितिक संरक्षण संभव हो रहा है।

सारांश

शंकरगढ़ की पारंपरिक सिलिका रेत ने ग्लास और बोतल उद्योग में अपनी जगह बनाई है। इस बदलाव की नींव उच्च गुणवत्ता, कम लागत और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक हैं। यह क्षेत्र बहुत जल्द औद्योगिक और आर्थिक विकास का एक नया उदाहरण बन सकता है।

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