कुछ साल पहले प्रदूषण और कचरे के लिए बदनाम प्रयागराज, 2025 की वायु गुणवत्ता सुधार रैंकिंग में 20वें से 7वें स्थान पर आ गया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण रैंकिंग से पता चलता है कि बदलाव के लिए ठोस प्रयास, जनता की भागीदारी और योजनाएं भी आवश्यक हैं।
प्रयागराज ने वायु गुणवत्ता सुधार रैंकिंग का विस्तार से जानकारी
- स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 की नवीनतम रैंकिंग में प्रयागराज 20वें से 7वें स्थान पर पहुंचा है, जिसमें 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं। पर्यावरण मंत्रालय की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु अभियान (NCAP) ने यह सर्वेक्षण संचालित किया। इसमें 130 शहरों को शामिल किया गया, जिन्हे जनसंख्या के आधार पर 3 श्रेणी में बाँटा गया।
- मुख्य सुधारों में शामिल हैं: सड़क धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण, मैकेनाइज़्ड रोड क्लीनिंग और पानी का छिड़काव, हरित मोबिलिटी और पौधारोपण अभियान, शहरी जंगलों का निर्माण और पश्चिमी प्रशासन में सुधार।
- आगरा तीसरे स्थान पर है, कानपुर पाँचवें, गाज़ियाबाद 18 से 11वें और वाराणसी 9वें-12वें स्थान पर है। पहले स्थान पर इंदौर, दूसरे पर जबलपुर तो तीसरे स्थान पर सूरत और आगरा संयुक्त रूप से हैं। उत्तर प्रदेश के 17 शहरों ने टॉप 50 में स्थान लिया।
- 3 लाख से 10 लाख लोगों की आबादी वाली श्रेणी में मुरादाबाद दूसरे जबकि झांसी तीसरे स्थान पर था। गोरखपुर बरेली और नोएडा क्रमशः पांचवें, सातवें, नौवें स्थान पर हैं।
प्रयागराज ने वायु गुणवत्ता रैंकिंग का इतिहास
- 2017-2020 तक प्रयागराज की हवा प्रदूषित श्रेणी में आती थी, जिसमें नियमित AQI (150 से 250) तक था।
- NCAP (राष्ट्रीय स्वच्छ वायु अभियान) ने बीते तीन वर्षों में नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नागरिक समूहों ने सैकड़ों जागरूकता अभियान और तकनीकी प्रयास किए, जो स्वच्छता और स्वास्थ्य पर प्रभाव डाला।
- हाल ही में वातावरणीय और नगरीय सुधारों के चलते प्रयागराज इस बार शीर्ष 10 में आ गया, जो पिछले वर्ष मात्र 20वें स्थान पर था।
सारांश
प्रयागराज प्रदेश में वायु गुणवत्ता सुधार में शीर्ष दस शहरों में एक होना विशेष उपलब्धि है। यह दिखाता है कि जब योजनाएं काम करती हैं और जनता सक्रिय होती है, तो हवा भी साफ होती है। अगर यह रुझान जारी रहा, तो प्रयागराज तीर्थराज के साथ भविष्य में एक “स्वच्छ वायु मॉडल शहर” भी बन जाएगा।
प्रयागराज में बिजली सुधार के लिए लगभग 28 करोड़ की योजना।

