एक छोटी-सी डांट ने एक किशोरी की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। प्रयागराज के अल्लापुर में रहने वाली 18 साल की इंटर की छात्रा ने पिता के ज्यादा मोबाइल चलाने पर फटकारने से तंग आकर 52 एम्लोडिपिन गोलियां (बीपी की दवा) एक साथ खा लीं। एसआरएन अस्पताल पहुंचने पर उसका बीपी लगभग ग़ायब जैसा रह गया था। जिसके बाद चार दिनों तक वेंटिलेटर पर रही। सौभाग्य से एक हफ्ते के कड़े इलाज के बाद जान बच गई।
प्रयागराज किशोरी बीपी गोलियां घटना का विवरण
मोबाईल का अधिक प्रयोग के कारण पिता ने डांटा और लड़की का मोबाइल छुपा दिया था। 24 घंटे फोन ना मिलने के बाद वह तनाव में आ गई, और उसने पिता की दवा की पूरी स्ट्रिप निगल ली। परिजन एसआरएन अस्पताल ट्रॉमा सेंटर ले गए, जहां से मेडिसिन विभाग रेफर किया गया। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके तिवारी ने देखा कि बीपी जीरो के करीब था। जिसके बाद तुरंत वेंटिलेटर पर डाल दिया गया।
अगले दिन उसका रक्तचाप बेहद कम (लगभग 50 तक) पहुंच गया और उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो रहा था। चिकित्सकों ने इलाज के लिए कई इंटरनेशनल जर्नल खंगाले। लो शुगर कंट्रोल करने वाले ग्लूकागॉन इंजेक्शन देने से उसमें सुधार हुआ। सात दिनों बाद मरीज डिस्चार्ज योग्य हुई। पिता ने पहले 20 गोलियां बताया, लेकिन फॉलो-अप पर सच कबूला कि गोलियों की संख्या 52 थीं।
दुर्लभ पॉइजनिंग का उदाहरण – डॉ. तिवारी
डॉ. तिवारी ने इसे ‘दुर्लभ पॉइजनिंग’ बताया। अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ टॉक्सिकोलॉजी में प्रकाशित होगा। ज्यादातर सुसाइड जहर या पेस्टीसाइड यूज होते हैं, लेकिन बीपी दवा कम होती है। यह केस लोगों को जागरूक कर सकता है।
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