अब प्रयागराज, विश्व प्रसिद्ध संगम नगरी के साथ बौद्ध संस्कृति का एक नया स्थायी केंद्र बनाने जा रहा है। प्रयागराज में बुद्ध विहार परियोजना न केवल आध्यात्मिकता को बढ़ावा देगी, बल्कि शहर का पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा देगी। यह परियोजना नैनी-अरैल क्षेत्र में प्रस्तावित है।
प्रयागराज में बुद्ध विहार परियोजना की मुख्य जानकारी
- इस परियोजना पर लगभग ₹2.5 करोड़ की लागत आएगी। राज्य पर्यटन मुख्यालय को यह प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जहां से सैद्धांतिक रूप से स्वीकृति भी मिल चुकी है और जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू होगा।
- बुद्ध विहार में भगवान बुद्ध के जीवन को दर्शाते हुए भित्ति चित्र (म्यूरल्स), एक ध्यान केंद्र और एक सभा हॉल होगा। वहीं परिसर की दीवाल पर जातक कथाओं का अंकन होगा।
- इस परियोजना का लक्ष्य प्रयागराज में पूरे वर्ष पर्यटन को बढ़ावा देना है। केवल कुंभ जैसे कार्यक्रमों या कम समय तक सीमित न रहते हुए।
यह भी देखें – नैनी क्षेत्र में ही बनाया जा रहा साहित्यिक पार्क।
प्रयागराज में बुद्ध विहार परियोजना की पृष्ठभूमि
प्रयागराज, गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के कारण हमेशा से आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। बुद्ध विहार जैसे कार्यक्रम अब शहर को धार्मिक और बौद्धिक पहचान देंगे। यह परियोजना महाकुंभ 2025 की घटना से प्रेरित होकर पर्यटकों को धार्मिक स्थानों पर अधिक समय बिताने के लिए काम करेगी।
अतिरिक्त जानकारी – ₹2.75 करोड़ की लागत से वरिष्ठ नागरिकों के लिए पास ही एक नया केंद्र बनाया जा रहा है। जिमखाना क्लब परिसर चंद्रशेखर आजाद पार्क में बनाए जा रहे इस केंद्र में योग ध्यान और और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं होंगी।
निष्कर्ष
बुद्ध विहार परियोजना प्रयागराज में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। शहर को एक आध्यात्मिक और इतिहासपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इस परियोजना से होटल, गाइड सेवाओं, और स्थानीय व्यवसायों की मांग में वृद्धि होगी।
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