प्रयागराज संगम जो की हमेशा से आस्था का केंद्र रहा है और इसका एक नजारा माघी पूर्णिमा स्नान के दिन देखने को मिला। 1 फरवरी 2026 को माघ मास की पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाई। यह माघ मेला का सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्वों से मे एक होता है, जो श्रद्धा और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।
माघी पूर्णिमा स्नान के प्रमुख अपडेट्स
माघी पूर्णिमा स्नान पर संगम नोज पर सुबह से ही भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही श्रद्धालु पावन स्नान और अनुष्ठान में रमे दिखे। श्रद्धालुओं की संख्या दोपहर 12 बजे तक 1.50 करोड़ तक पहुँच चुकी थी। जो बढ़कर दोपहर 2 बजे 1 करोड़ 82 लाख हो गई। शाम 6 बजे तक फाइनल आँकड़ा 2.10 करोड़। माघ के अंतिम स्नान के साथ कल्पवासी विदा हो गए। समग्र दिनभर की गतिविधियों में कुल लगभग 2.10 करोड़ भक्तों के स्नान ने इसे एक ऐतिहासिक उत्सव बना दिया।
वहीं बात की जाय माघ मेला 2026 में श्रद्धालुओं का आकड़ा 26 जनवरी तक 20 करोड़ पहुँच चुका है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की थी, जिसमें ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी, SDRF और NDRF के साथ साथ कई टीमों की तैनाती शामिल थी।
माघी पूर्णिमा 2026: क्यों है यह दिन खास?
माघी पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा को आती है। यह दिन आध्यात्मिक लाभ, धार्मिक स्नान और दान का पवित्र अवसर माना जाता है।
धार्मिक महत्त्व
- आध्यात्मिक शुद्धि: संगम में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष मिलता है।
- कल्पवास का अंत: इसी दिन परंपरागत रूप से एक महीने तक चलने वाले कल्पवास (Kalpavas) का समापन होता है, जिसमें लोग तपस्या करते हैं और साधना करते हैं।
- पूर्णिमा के अनुष्ठान: ब्रह्ममुहूर्त में स्नान, दान-धर्म, चंद्र पूजा और व्रत बहुत महत्वपूर्ण हैं।
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