संगम के किनारे ठंडी हवा में जयकारों की गूंज, लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हुए, प्रयागराज का माघ मेला फिर से जीवंत हो उठा है। 3 जनवरी को कड़ाके की सर्दी के बावजूद पौष पूर्णिमा स्नान ने वर्ष की सबसे बड़ी धार्मिक आयोजन की शानदार शुरुआत की। यह न सिर्फ आस्था का समंदर है, बल्कि संस्कृति का भी अनोखा संगम।
पौष पूर्णिमा स्नान – आस्था और भक्ति का विराट स्वरूप
जब दिन की पहली धूप संगम की पावन लहरों पर पड़ी, तो श्रद्धालुओं का समुंदर तटों तक लबालब दिखा। माघ मेला प्राधिकरण के अनुसार लगभग 20-30 लाख से अधिक लोगों ने इस पावन दिन पौष पूर्णिमा स्नान किया, जो कि आत्मा की शुद्धि, पापमोचन और धार्मिक समर्पण की श्रेष्ठ परंपरा का प्रतीक है।
भारत भर से सुबह आए श्रद्धालु तट पर कतारों में खड़े दिखे। लगभग 10,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में प्रशासन ने दस स्नान घाट और नौ पोंटून पुल बनाकर भीड़ नियंत्रण को आसान बनाया।
माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां
- 3 जनवरी: पौष पूर्णिमा (पहला स्नान)
- 14 जनवरी: मकर संक्रांति
- 18 जनवरी: मौनी अमावस्या
- 23 जनवरी: वसंत पंचमी
- 1 फरवरी: माघी पूर्णिमा
- 15 फरवरी: महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान)
माघ मेला 2026 में बॉलीवुड/लोक कलाकारों का आने वाला कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग ने देश भर से प्रसिद्ध कलाकारों को माघ मेले को रंग देने के लिए बुलाया है। 4 से 5 जनवरी को गंगा पंडाल में दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव होगा। जानकारी के अनुसार 4 जनवरी को पद्मश्री मालिनी अवस्थी अवधी-भोजपुरी लोक गीतों से माहौल बनाएंगी।
उसी शाम प्रयागराज से संगीता मिश्रा और उदय चंद्र परदेसी के लोक गीत, वाराणसी से राम जानम शंख वादन, लखनऊ से वरुण मिश्रा का शास्त्रीय गायन, कृति श्रीवास्तव का ढेड़िया नृत्य और नीता जोशी का कथक होगा। 5 जनवरी को चंडीगढ़ की सूफी गायिका ममता जोशी हेडलाइन होगी, साथ में पंडित विनोद द्विवेदी का ध्रुपद, हरप्रीत कौर का लोक गीत और विपिन यादव का दीवरी-पाई दंडा नृत्य।
आस्था का अनंत संगम
माघ मेला 2026 ने पौष पूर्णिमा पर 22 लाख स्नानों से शानदार शुरुआत की। मालिनी अवस्थी जैसे कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम को अविस्मरणीय बनाएंगे। प्रमुख स्नान तैयार हो रहे हैं—प्रयागराज एक बार फिर आध्यात्मिक राजधानी बन जाएगा।
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