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मंगलवार, मार्च 10, 2026

मेघनाद साहा: एक वैज्ञानिक जिनकी विज्ञान-यात्रा प्रयागराज से होकर गुज़री

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भारतीय विज्ञान के इतिहास में मेघनाद साहा का नाम शीर्ष पर आता है। तारों की रोशनी और गर्मी को समझने के लिए उनकी आयनाइज़ेशन थ्योरी (Saha Equation) आज भी खगोल भौतिकी की नींव मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रयागराज (तब का इलाहाबाद) में इस थ्योरी का विकास और भारतीय विज्ञान के रुख को बदलने का महत्वपूर्ण लेख लिखा गया था?

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

मेघनाद साहा का जन्म 6 अक्टूबर 1893 को पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के ढाका के शिओरताली गाँव में हुआ था। साधारण परिवार में जन्मे मेघनाद साहा ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई की। कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज से स्नातक और परास्नातक गणित और भौतिकी में शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे भारतीय वैज्ञानिक समुदाय में एक प्रसिद्ध नाम बन गए।

तारों की आत्मा पढ़ने का विज्ञान(Saha Ionization Equation)

1920 ई. में लंदन में रहकर इन्होंने थर्मल आयोनाइजेशन(thermal Ionization) पर काम किया जिसे सहा समीकरण(Saha Equation) कहा जाता  है। इस फार्मूला के जरिए तारों का रंग, ताप और संरचना उनके प्लाज़्मा में इलेक्ट्रॉनों के आयनित होने पर निर्भर करता है। इस बहुमूल्य खोज के लिए इन्हे नोबल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। 

प्रयागराज: विज्ञान का केंद्र और मेघनाद साहा का स्वर्ण युग (1923–1938)

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में योगदान

1923 में, मेघनाद साहा को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग का अध्यक्ष बनाया गया था। भारतीय विश्वविद्यालयों ने उस समय विज्ञान शोध को गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन साहा ने इस धारणा को बदल दिया।

मेघनाद साहा के द्वारा शोध, शिक्षण और पुस्तक लेखन

  1. उन्होंने विद्यार्थीओं कों वैज्ञानिक सोच के लिए प्रेरणा दी। 
  2. A Treatise on Heat (1931) उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों को विश्वविद्यालय कई सालों तक पढ़ाते रहे। 
  3. भारत में परमाणु भौतिकी पाठ्यक्रम को परास्नातक में शामिल किया गया।   

संस्थान निर्माण और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी

उन्होंने 1930 में प्रयागराज में “Academy of Sciences of the United Provinces” की स्थापना की। बाद में यही अकादमी “National Academy of Sciences, India (NASI)” के नाम से जानी जाती है। 

मेघनाद साहा के द्वारा छात्रों का मार्गदर्शन

दुलत सिंह कोठारी जैसे विद्यार्थी उनकी प्रेरणा से आगे बढ़कर भारत के रक्षा वैज्ञानिक सलाहकार बने। प्रयागराज में उनके कार्यकाल ने भारतीय वैज्ञानिक परंपरा को मजबूत आधार दिया।

मेघनाद साहा का स्वतंत्र भारत में भूमिका

1951–1952 में पहले आम चुनाव के दौरान, उन्होंने कलकत्ता नॉर्थ वेस्ट से सांसद चुने गए। उन्हें संसद में शिक्षा में सुधार, विज्ञान नीति और नदी परियोजनाओं पर बल दिया गया। वे संसद में वैज्ञानिकों की आवाज बन गए।

सम्मान और विरासत

  • Fellow of the Royal Society (1927)
  • Saha Institute of Nuclear Physics (SINP), कोलकाता की स्थापना उनके नाम पर है।
  • उनकी याद में भारत सरकार दिसंबर 1993 में डाक टिकट भी जारी किया है।
  • प्रयागराज में NASI आज भी उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही है। 

 निष्कर्ष

मेघनाद साहा सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं थे; वे एक विचारधारा थे जो शिक्षा, शोध, संस्थान निर्माण और राष्ट्र निर्माण का मूल था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय और उसके छात्र उनके विचारों के साक्षी बने। आज जब हम भारत को विज्ञान और शिक्षा में आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हैं, तो मेघनाद साहा की प्रयागराज यात्रा को याद करना चाहिए।  उन्होंने यहाँ विज्ञान की संस्कृति बोई और सिर्फ अध्यापन किया।

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