भारत के मिस्टर भरोसेमंद जब राहुल द्रविड़ नें जब संन्यास की घोषणा की तो भारत को एक ऐसे ही खिलाड़ी की जरूरत थी। तब उनकी कमी को पुरा करने की जिम्मेदारी उठाई चेतेश्वर पूजरा नें। राजकोट के शांत मैदान से ऑस्ट्रेलिया के तेज-तर्रार पिचों तक, पुजारा का नाम ‘रेड-बॉल’ क्रिकेट का पर्याय बन गया था। 24 अगस्त 2025 को, इस धैर्यपूर्ण और तकनीकी बल्लेबाज ने भारत के लिए 103 टेस्ट मैच खेलने के बाद संन्यास की घोषणा की। जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ WTC फ़ाइनल में आखिरी बार खेले थे।
संन्यास की घोषणा और पूरे क्रिकेट जगत की प्रतिक्रिया
उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैन्डल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना, और हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देना..। इसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। लेकिन, जैसा कि कहते हैं, हर अच्छी चीज़ का अंत होता है और अत्यंत आभार के साथ मैंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट्स से संन्यास का ऐलान किया है।”
“आपके प्यार एवं समर्थन के लिए शुक्रिया।”
पुजारा को अनिल कुंबले ने “खेल का महान एंबेसडर” बताया और उनके करियर की तारीफ़ की।
सुनील गावस्कर ने ट्वीट किया, “चेतेश्वर, शाबाशी। तुमने भारत को गौरवान्वित किया है।”
भारतीय टीम के वर्तमान कोच गौतम गंभीर ने उनकी लड़ने की क्षमता को सलाम करते हुए लिखा, “He stood tall when the storm raged, he fought when hope was fading. Congratulations Pujji.”
युवराज सिंह नें लिखा, “एक ऐसा व्यक्ति जिसने हमेशा अपना तन, मन और आत्मा देश के लिए समर्पित कर दिया! आपके शानदार करियर के लिए बहुत-बहुत बधाई पूजी!”
वी.वी.एस. लक्ष्मण, “साहस, जुझारूपन और गाबा टेस्ट में अदम्य आत्मबल।”
उनकी संन्यास की घोषणा पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

पुजारा की टेस्ट सफर, लड़ाई और रिकॉर्ड्स
चेतेश्वर पुजारा नें अपने कैरियर की शुरुआत 2010 ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट मैच से की थी। उन्होंने कुल 103 टेस्ट मैचों में 43.60 की औसत से 7195 रन बनाए। जिसमें उन्होंने 19 शतक एवं 35 अर्द्धशतक भी लगाएं है जिसमें इंग्लैंड के खिलाफ(2012) सर्वश्रेष्ठ पारी 206 रन की खेली गई। वहीं प्रथम श्रेणी में उन्होंने 66 शतक की मदद से 21301 रन भी बनाए है। पुजारा ने घरेलू क्रिकेट में सौराष्ट्र(पदार्पण 2005) और काउंटी क्रिकेट में Sussex के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है।
2018-19 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज़ में, पुजारा ने भारतीय टीम की टेस्ट जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने उस सीरीज़ में 521 रन बनाए और टीम को एक ऐतिहासिक जीत दिलाई। और मान ऑफ द सीरीज रहे।
पुजारा टेस्ट क्रिकेट में अपनी दृढ़ता और ‘डिफेंसिव’ शैली के लिए जाना जाता रहा है। राहुल द्रविड़ के बाद, उन्होंने “नंबर-3” बल्लेबाज के रूप में भारत का भरोसा जीता।
IPL और अन्य प्रारूप मेंं कैरियर
आईपीएल में आखिरी बार चेन्नई सुपर किंग्स(2021) का हिस्सा रहे। उन्होंने भारतीय टीम के लिए मात्र 5 वन-डे 2013-14 के मध्य मैच खेलें हैं। जबकि कुल मिलाकर 70 T-20 मैचों में 1556 रन बनाए हैं। उन्होंने आईपीएल में कोलकाता नाइटराइडर्स (2010), रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (2011–2013) और किंग्स इलेवन पंजाब (2014) के लिए भी खेला।
श्रेष्ठ पारियाँ
- 206* vs इंग्लैंड, अहमदाबाद (2012)
- 202 vs ऑस्ट्रेलिया, रांची (2017)
- 123 vs ऑस्ट्रेलिया, एडिलेड (2018)
- 153 vs श्रीलंका, कोलंबो (2017)
- 56 vs ऑस्ट्रेलिया, गाबा (2021)

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पुजारा का प्रभाव और लोगों की राय
खेल समीक्षकों का कहना है कि पुजारा के जाने से टीम इंडिया की टेस्ट बैटिंग लाइनअप में एक संतुलन में बदलाव आ सकता है। उन्हें सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने ‘रियल टेस्ट मैन’ और ‘भारतीय द्रविड़’ जैसा कहा। साथी खिलाड़ियों ने पुजारा के धैर्य, शांति और भारत के लिए जो जुनून दिखाया उसकी उम्मीद की। क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने कहा, “पुजारा एक युग का अंत हैं, जो पुरानी भारतीय टेस्ट बैटिंग की विरासत को आगे बढ़ाते थे।”
पत्नी गायत्री पुजारा ने कहा, “चेतेश्वर ने हमेशा परिवार और देश को प्राथमिकता दी, हम गर्व महसूस करते हैं।”
निष्कर्ष
चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है, लेकिन उनका साहस और विरासत भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श होंगे। अब वे युवा खिलाड़ियों को कमेंट्री, कोचिंग और प्रशासन में प्रेरित करेंगे। यह “वॉल” मैदान छोड़ सकता है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में उसकी याद हमेशा रहेगी।
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